गर्मी में चाहिए भरपूर सब्जियां? मार्च में मिट्टी में मिला दें 2 चीजें, लहलहा उठेंगे पौधे

गर्मी में चाहिए भरपूर सब्जियां? मार्च में मिट्टी में मिला दें 2 चीजें, लहलहा उठेंगे पौधे


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गर्मियों में चाहिए भरपूर सब्जियां? मार्च में मिट्टी में मिला दें ये 2 चीजें

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Gardening Tips: अगर आप गर्मियों में अपनी बगिया में भरपूर सब्जियां और फल उगाना चाहते हैं तो मार्च का महीना इसकी तैयारी के लिए सबसे सही समय माना जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय मिट्टी में सही तरह की जैविक खाद मिलाने से पौधों की ग्रोथ काफी बेहतर हो जाती है. गोबर खाद और केंचुआ खाद मिट्टी को उपजाऊ बनाकर पौधों को जरूरी पोषण देती हैं और उत्पादन बढ़ाने में मदद करती हैं. रासायनिक खाद के मुकाबले जैविक खाद मिट्टी की गुणवत्ता को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखती है. यही वजह है कि अब किसान और बागवानी करने वाले लोग तेजी से जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं.

शिवांक द्विवेदी, सतना: गर्मियों का मौसम आते ही लोग अपनी बगिया में ताजी सब्जियां और फल उगाने की तैयारी शुरू कर देते हैं. लेकिन अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ पौधे लगाना ही काफी नहीं होता बल्कि मिट्टी की सेहत का ख्याल रखना सबसे जरूरी होता है. अगर मिट्टी में पोषण की कमी है तो पौधे ठीक से बढ़ नहीं पाते और उत्पादन भी कम हो जाता है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च का महीना बगिया तैयार करने के लिए सबसे बेहतर समय होता है. इस समय मिट्टी में सही तरह की जैविक खाद मिलाकर उसे उपजाऊ बनाया जाए तो गर्मियों में लगने वाली सब्जियां और फल अच्छी तरह बढ़ते हैं और भरपूर पैदावार मिलती है.

गोबर खाद और केंचुआ खाद सबसे भरोसेमंद
सोहावल विकासखंड की उन्नयन विकास अधिकारी सुधा पटेल ने लोकल 18 को बताया कि जैविक खेती के लिए आज भी पारंपरिक खाद सबसे ज्यादा कारगर मानी जाती हैं. इनमें गोबर खाद और केंचुआ खाद प्रमुख हैं. गोबर खाद बनाने के लिए गोबर को एक गड्ढे में डालकर लगभग तीन महीने तक सड़ने दिया जाता है. जब यह पूरी तरह सड़कर तैयार हो जाती है तब यह मिट्टी के लिए बेहद फायदेमंद खाद बन जाती है. वहीं केंचुआ खाद यानी वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए गोबर में लाल केंचुए डालकर इसे करीब दो महीने तक छाया में रखा जाता है. इस दौरान केंचुए गोबर को पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल देते हैं.

मिट्टी को बनाती है भुरभुरी और उपजाऊ
विशेषज्ञों के अनुसार जैविक खाद का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाती है. जब गोबर या केंचुआ खाद को मिट्टी के साथ लगभग 30:70 के अनुपात में मिलाया जाता है तो मिट्टी भुरभुरी हो जाती है. इससे पौधों की जड़ें आसानी से फैलती हैं और पौधों को जरूरी पोषण मिलता है. इसके अलावा जैविक खाद में मौजूद एनपीके और माइक्रोन्यूट्रिएंट पौधों की वृद्धि के लिए बेहद जरूरी होते हैं. यही नहीं यह मिट्टी की पानी पकड़ने की क्षमता को भी बढ़ाती है जिससे बगिया में लंबे समय तक नमी बनी रहती है. इससे पौधों को बार-बार पानी देने की जरूरत भी कम पड़ती है.

रासायनिक खाद से बेहतर क्यों है जैविक खाद
एक्सपर्ट बताती हैं कि आजकल कई किसान और बगिया लगाने वाले लोग डीएपी और यूरिया जैसी रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते है लेकिन लंबे समय में यह मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसके उलट जैविक खाद मिट्टी को प्राकृतिक तरीके से पोषण देती है और उसकी उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखती है. जैविक खाद से उगाई गई फल-सब्जियां रसायनों से मुक्त होती हैं इसलिए उनका स्वाद भी बेहतर होता है और वे स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित रहती हैं. यही वजह है कि अब लोग धीरे-धीरे जैविक खेती और जैविक बागवानी की ओर ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं.

जैविक खाद यूनिट लगाने पर सरकार दे रही अनुदान
अगर कोई किसान या बगिया लगाने वाला व्यक्ति खुद जैविक खाद तैयार करना चाहता है तो उसके लिए भी सरकार की ओर से मदद दी जा रही है. उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के तहत वर्मीकम्पोस्ट यूनिट बनाने के लिए अनुदान मिलता है. इसके लिए एक पक्का स्ट्रक्चर बनाना होता है जिसमें शेड की व्यवस्था रहती है. इस यूनिट को तैयार करने पर करीब 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है और अधिकतम लगभग 50 हजार रुपये तक का अनुदान मिल सकता है. इसके अलावा एचडीपीई बेड या चलायमान बेड के जरिए भी वर्मीकम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है जिसके लिए उद्यानिकी विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर लाभ लिया जा सकता है.

जैविक बगिया से मिलेगा स्वस्थ उत्पादन
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह इंसान के स्वस्थ रहने से शरीर के सभी अंग ठीक से काम करते हैं उसी तरह अगर मिट्टी स्वस्थ होगी तो पौधे भी स्वस्थ रहेंगे और अच्छी पैदावार देंगे. इसलिए गर्मियों की बगिया तैयार करने से पहले मिट्टी को जैविक खाद से समृद्ध करना बेहद जरूरी है. इससे न सिर्फ बगिया की पैदावार बढ़ेगी बल्कि परिवार को रसायन मुक्त और पौष्टिक फल-सब्जियां भी मिलेंगी.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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