बैंगन की फसल बचानी है तो इन 2 कीटों से रहें सतर्क, एक्सपर्ट के सही मैनेजमेंट से एक एकड़ मे

बैंगन की फसल बचानी है तो इन 2 कीटों से रहें सतर्क, एक्सपर्ट के सही मैनेजमेंट से एक एकड़ मे


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Brinjal Cultivation: मार्च के महीने में बैंगन की खेती किसानों के लिए मुनाफे का मजबूत जरिया बन सकती है लेकिन इसमें लगने वाले दो खतरनाक कीट पूरी फसल को बर्बाद कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान शुरुआत से ही फेरोमोन ट्रैप, नीम आधारित छिड़काव और सही दूरी पर रोपाई जैसी तकनीकों को अपनाएं तो पैदावार बेहतर होती है.

Bengan Ki Kheti: मध्य प्रदेश के सतना जिले समेत आसपास के इलाकों में मार्च का महीना किसानों के लिए बैंगन की खेती शुरू करने का बेहतरीन समय माना जाता है. इस समय लगाई गई बैंगन की फसल गर्मी और बारिश के बीच की अगेती फसल बनती है जिससे बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है और किसानों को बेहतर कीमत मिलती है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक अगर किसान सही किस्मों का चयन करें, वैज्ञानिक तरीके से खेती करें और समय रहते कीट प्रबंधन कर लें तो यह फसल कम लागत में अच्छा मुनाफा दे सकती है.

मार्च में ऐसे करें बैंगन की खेती
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बैंगन की अच्छी पैदावार के लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है जिसमें जल निकासी की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए. मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना फसल के लिए लाभदायक रहता है. मार्च के महीने में तापमान अधिक और नमी कम होने के कारण खेत में नियमित सिंचाई करना जरूरी होता है. आमतौर पर 4 से 6 दिन के अंतराल पर सिंचाई करने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है. साथ ही मल्चिंग का उपयोग करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार की समस्या भी कम होती है.

गर्मियों की खेती के लिए किसान वीएनआर, उत्कल और अन्य उन्नत हाइब्रिड किस्मों का चयन कर सकते हैं. इन किस्मों में उत्पादन अच्छा मिलता है और कुछ किस्में तना छेदक जैसे कीटों के प्रति अपेक्षाकृत प्रतिरोधी भी होती हैं. ध्यान दें कि रोपाई करते समय पंक्तियों के बीच 60 से 75 सेंटीमीटर और पौधों के बीच लगभग 60 सेंटीमीटर की दूरी रखना जरूरी होता है जिससे पौधों को पर्याप्त जगह और पोषण मिल सके.

इन दो कीटों से होता है सबसे ज्यादा नुकसान
लोकल 18 को जानकारी देते हुए पेस्टीसाइड एक्सपर्ट अमित सिंह ने बताया कि फरवरी, मार्च बैंगन की बोनी के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है. इस समय लगाई गई फसल की हार्वेस्टिंग के दौरान बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं जिससे किसानों को फायदा होता है. लेकिन इस दौरान कीटों का प्रकोप भी काफी बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि बैंगन की फसल में तना एवं फल छेदक और सफेद मक्खी सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. यदि इन कीटों का समय पर प्रबंधन नहीं किया गया तो पैदावार में 70 से 90 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. इसलिए किसानों को शुरू से ही इन पर निगरानी रखनी चाहिए.

तना और फल छेदक से ऐसे करें बचाव
तना एवं फल छेदक के प्रबंधन के लिए सबसे पहले खेत में नियमित निगरानी जरूरी होती है. जिन टहनियों में मुरझाने के लक्षण दिखाई दें या जिन फलों में छेद नजर आएं उन्हें तुरंत काटकर नष्ट कर देना चाहिए ताकि कीट का प्रसार न हो सके. इसके अलावा खेत में प्रति एकड़ 5 से 6 फेरोमोन ट्रैप लगाना काफी प्रभावी माना जाता है. ये ट्रैप नर कीटों को आकर्षित कर पकड़ लेते हैं जिससे उनकी संख्या कम हो जाती है और प्रजनन चक्र भी प्रभावित होता है. इसके साथ ही 3000 पीपीएम नीम तेल या नीम बीज अर्क का 10 से 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना भी फायदेमंद रहता है. यदि कीटों का प्रकोप अधिक हो जाए तो कोराजन जैसे कीटनाशक का 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है.

सफेद मक्खी से बचाव भी है जरूरी
सफेद मक्खी भी बैंगन की फसल के लिए खतरनाक कीट मानी जाती है. यह पत्तियों के नीचे चिपककर रस चूसती है जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे मुड़ जाती हैं. इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन पर असर पड़ता है. इससे बचाव के लिए खेत में पीले रंग के स्टिकी ट्रैप लगाना काफी प्रभावी तरीका माना जाता है क्योंकि सफेद मक्खियां पीले रंग की ओर आकर्षित होकर इन पर चिपक जाती हैं. इसके अलावा 40 से 50 मिलीलीटर नीम तेल का घोल बनाकर छिड़काव करना भी लाभकारी होता है. यदि प्रकोप अधिक हो जाए तो इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल को 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है.

सही प्रबंधन से मिल सकता है अच्छा मुनाफा
विशेषज्ञों के अनुसार बैंगन की फसल रोपाई के लगभग डेढ़ महीने बाद फूल देना शुरू कर देती है और उसके बाद लगातार उत्पादन मिलता रहता है. हाइब्रिड बीज की खेती में एक एकड़ के लिए करीब 100 ग्राम बीज पर्याप्त होता है. वहीं फफूंदनाशक और कीटनाशक पर एक एकड़ में लगभग 8 से 10 हजार रुपये तक का खर्च आता है. अगर किसान सही तकनीक, कीट प्रबंधन और पोषक तत्वों का समय-समय पर उपयोग करें तो बैंगन की खेती से अच्छी पैदावार मिल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि एक एकड़ में इस फसल से करीब 80 हजार से 1 लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है जो किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया बन सकता है.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



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