टाइप 2 मधुमेह से जूझ रहे मरीजों के लिए नियमित योगासन बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। एम्स भोपाल के फिजियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. वरुण मल्होत्रा ने नई दिल्ली के हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में आयोजित व्याख्यान में में कहा कि प्रतिदिन
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उन्होंने एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि 56 टाइप 2 मधुमेह रोगियों ने 40 दिनों तक नियमित योगासन किया, जिससे उनके स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव दर्ज हुए।
एम्स के फिजियोलॉजी विभाग के डॉ. वरुण मल्होत्रा ने हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में व्याख्यान दिया।
योग का हृदय और मस्तिष्क पर वैज्ञानिक प्रभाव
डॉ. वरुण ने हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में “एचआरवी और ईईजी को संशोधित करने में योग की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि एचआरवी यानी हार्ट रेट वेरिएबिलिटी हृदय की धड़कनों के बीच समय के अंतर को मापती है, जबकि ईईजी मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को दर्शाती है। योग का नियमित अभ्यास इन दोनों प्रणालियों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है और तनाव को कम करने में मदद करता है।
यह सत्र फिजियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद इकबाल आलम द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में डॉ. मल्होत्रा ने एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ. माधवानन्द कर के मार्गदर्शन में भागीदारी की।
कछुए की तरह धीमी-नियंत्रित सांस लेने का कनेक्शन दीर्घायु से
डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि योग में श्वास तकनीकों का विशेष महत्व है। धीमी और गहरी श्वास, जैसे अनुलोम-विलोम, शरीर की विश्रांति प्रणाली को सक्रिय करती है और मन को शांत बनाती है। इसके विपरीत कपालभाति जैसी तीव्र श्वास तकनीक शरीर की सक्रियता और चयापचय को बढ़ाती है।
इससे वजन प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने बंदर और कछुए की श्वसन दर का उदाहरण देते हुए समझाया कि धीमी और नियंत्रित श्वास दीर्घायु और मानसिक एकाग्रता से जुड़ी होती है।

डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन के संतुलन का वैज्ञानिक माध्यम है।
40 दिन के योग अभ्यास से दिखे सकारात्मक परिणाम
व्याख्यान के दौरान डॉ. मल्होत्रा ने एक अध्ययन का उल्लेख किया। जिसमें टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित 56 मरीजों को शामिल किया गया था। इन मरीजों ने लगातार 40 दिनों तक प्रतिदिन योगासन का अभ्यास किया।
अध्ययन में पाया गया कि नियमित योग अभ्यास से मरीजों के वजन और बॉडी मास इंडेक्स में कमी आई। इसके साथ ही कमर-कूल्हा अनुपात घटा और दुबले शरीर द्रव्यमान में वृद्धि हुई। खास बात यह रही कि योग के नियमित अभ्यास से इंसुलिन प्रतिरोध में भी सुधार देखा गया, जिससे मधुमेह नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
मस्तिष्क में बढ़ती है सकारात्मक गतिविधि
योग के नियमित अभ्यास से मस्तिष्क के अग्र भाग में सकारात्मक गतिविधि बढ़ती है, जिससे प्रसन्नता की भावना उत्पन्न होती है और चिंता कम होती है। डॉ. मल्होत्रा के अनुसार, नियमित योग और ध्यान से मस्तिष्क की आदतों में सकारात्मक परिवर्तन संभव है, जिससे व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक संतुलित और शांत बन सकता है।
तनाव से मुक्ति के लिए दिए व्यावहारिक सुझाव
व्याख्यान के अंत में उन्होंने तनाव से मुक्ति और बेहतर जीवनशैली के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव भी दिए। इनमें नियमित ध्यान, सकारात्मक सोच, एक समय में एक विचार पर ध्यान केंद्रित करना, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम शामिल हैं।
इसके अलावा उन्होंने सकारात्मक प्रतिज्ञापन और ध्यान तकनीकों जैसे हॉग-सौ एकाग्रता तथा ॐ ध्यान का भी उल्लेख किया। डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन के संतुलन का वैज्ञानिक माध्यम है, जो स्वस्थ और संतुलित जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।