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Suryakumar Yadav 20 World Cup: अपनी बल्लेबाजी, कप्तानी और भाव भंगिमा, सभी में सूर्यकुमार अलग हैं, लेकिन जब वह खेल से विदा लेंगे तो उनका नाम एम एस धोनी, रोहित और कपिल देव के साथ लिया जाएगा. भारत को विश्व कप जिताने वाला कप्तान. एक आम आदमी का कप्तान.
टी-20 ट्रॉफी के साथ सूर्यकुमार यादव
अहमदाबाद: तिलक वर्मा ने जैसे ही जैकब डफी का कैच लपककर रविवार रात टी-20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत पर मुहर लगाई, कप्तान सूर्यकुमार यादव के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान दौड़ गई. कई मिथक तोड़कर मिली खिताबी जीत की मुस्कान. यह मुस्कान उस कप्तान की थी, जिसने बतौर बल्लेबाज खराब प्रदर्शन के लिए आलोचना झेलने के बावजूद खिताबी जीत दिलाकर आलोचकों का मुंह बंद किया. वैसे जीत हो या हार, सूर्यकुमार भावनाओं पर काबू रखना बखूबी जानते हैं.
वर्ल्ड कप में सूर्या बना पाए 242 रन
विश्व कप से पहले द्विपक्षीय श्रृंखला में न्यूजीलैंड से मिली हार और पिछले दो साल में बड़ी पारी नहीं खेलने के कारण आलोचना से सूर्यकुमार पर भारी दबाव था. वर्ल्ड कप के दौरान सूर्या का बल्ला पूरी तरह खामोश रहा. टूर्नामेंट के नौ मैच में सूर्या सिर्फ एक ही अर्धशतक जमा पाए. यूएसए के खिलाफ पहले मैच में उन्होंने नाबाद 84 रन बनाए थे, उसके बाद से फ्लॉप ही रहे. फाइनल में तो पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गए.
सूर्यकुमार यादव के करियर का क्या भविष्य?
वर्ल्ड कप में सूर्या ने जैसा खेला, उससे गुस्साए फैंस ये तक कहने लगे कि अगर सूर्यकुमार यादव टीम के कप्तान नहीं होते तो उन्हें प्लेइंग इलेवन तक में जगह नहीं मिलती. अब जब भारत वर्ल्ड चैंपियन बन चुका है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्या ने साफ कर दिया कि टीम का अगला लक्ष्य 2028 में लॉस एंजेलिस में होने वाला क्रिकेट ओलंपिक गोल्ड मेडल है. सूर्या-गंभीर की जुगलबंदी भी इस ओर इशारा कर रही है. जब तक गौतम गंभीर टीम के कोच हैं, तब तक सूर्या की कप्तानी भी खतरे से बाहर है.
धोनी के स्पेशल क्लब में आए सूर्या
सूर्यकुमार यादव से पहले अपनी सरजमीं पर सिर्फ महेंद्र सिंह धोनी ने भारत को 2011 में वनडे विश्व कप दिलाया था. कपिल देव (1987) और रोहित शर्मा (2023) भारत में विश्व कप नहीं जीत सके थे. रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने 2024 में वेस्टइंडीज में टी20 विश्व कप जीता था. सूर्यकुमार की मुंबई के ही रोहित से तुलना लाजमी थी, लेकिन सूर्यकुमार का एक ही मंत्र था कि दबाव नहीं लेने का. टूर्नामेंट के दौरान उनकी प्रेस कांफ्रेंस में यह साफ था.
प्लेयर्स पर नहीं आने दिया टेंशन
चाहे अभिषेक शर्मा को लेकर सवाल हो या कुलदीप यादव के बारे में, उन्होंने चुटीले जवाब मुस्कुराते हुए दिए. सूर्यकुमार ने टीम में भी कभी ‘सूर्या दादा’ यानी बड़ा भाई बनने की कोशिश नहीं की बल्कि सभी को अपना रास्ता खुद बनाने की आजादी दी. उन्होंने फाइनल से पहले प्रेस कांफ्रेंस में कहा था, ‘मैं कप्तान बनने के पांच छह महीने के भीतर टीम को समझने लगा और जुड़ने लगा फिर मुझे लगा कि बड़ा भाई या पिता बनने की जरूरत नहीं है, उन्हें खुद अपना रास्ता तय करने की आजादी देनी चाहिए.’
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अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. जबरदस्त स्ट्राइक रेट के साथ पिछले एक दशक से उनकी नाबाद पारी जारी है. अपनी ऑलराउंड क्षमता के…और पढ़ें