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Green Chilli Cultivation: किसान अब हरी मिर्च की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. हरी मिर्च कम लागत में तैयार हो जाती है. जिले के ज्यादातर किसान अब पारंपरिक खेती की बजाय नकदी फसलों की खेती करना पसंद कर रहे हैं. इनमें से एक फसल हरी मिर्च है, जिसकी मांग सालभर बनी रहती है. (रिपोर्ट: सावन पाटिल/खंडवा)
हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए नकदी फसल साबित हो रही है. हरी मिर्च ऐसी फसल है, जिसकी मांग हर घर में रहती है, चाहें सलाद हो, सब्जी हो या अचार, रसोई में हरी मिर्च के बिना स्वाद अधूरा है. यही वजह है कि बाजार में इसकी डिमांड सालभर बनी रहती है और किसानों को लगातार आमदनी का मौका मिलता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसान मिर्च की रोपाई करते हैं, तो 60–70 दिनों में फसल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. खास बात यह है कि एक बार पौध लगाने के बाद 8 से 10 बार तक तुड़ाई की जा सकती है. यानी एक ही फसल से कई महीनों तक कमाई संभव है. सही देखभाल और बाजार से जुड़ाव होने पर किसान हर महीने अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं.
खंडवा के कृषि सलाहकार नवनीत रेवापाटी लोकल 18 को बताते हैं कि हरी मिर्च की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम और मुनाफा ज्यादा होता है. बाजार में ताजा हरी मिर्च का अच्छा भाव मिल जाता है. अगर किसान सीधे मंडी या बड़े व्यापारियों से जुड़ जाएं, तो उन्हें और बेहतर दाम मिल सकते हैं. निमाड़ की मिर्च तो विदेशों तक जाती है, जिससे यहां के किसानों को बड़ा बाजार मिलता है.
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अच्छी पैदावार के लिए खेत की गहरी जुताई जरूरी है. अंतिम जुताई के समय 20-25 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में मिला दें. इसके साथ संतुलित उर्वरक देना भी जरूरी है.<br />नाइट्रोजन: 50–60 किलोग्राम (प्रति हेक्टेयर)<br />फास्फोरस: 60–70 किलोग्राम (प्रति हेक्टेयर)<br />पोटाश: 60 किलोग्राम (प्रति हेक्टेयर)<br />खाद का संतुलित उपयोग पौधों की बढ़वार और फलन दोनों के लिए फायदेमंद रहता है.
5 से 6 सप्ताह पुरानी स्वस्थ पौध का चयन करें. खेत में कूड़ (मेड़) बनाकर रोपाई करें और तुरंत हल्की सिंचाई करें. इससे पौधे जल्दी जम जाते हैं और ग्रोथ अच्छी होती है. 7–10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना बेहतर रहता है लेकिन पानी का जमाव नहीं होना चाहिए.
हरी मिर्च की फसल से प्रति हेक्टेयर 150 से 250 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है, जो किस्म और देखभाल पर निर्भर करता है. मंडी में भाव अच्छा मिलने पर किसान एक सीजन में लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. बार-बार तुड़ाई होने से हर महीने नकदी मिलती रहती है, जिससे खेती का खर्च भी आसानी से निकल जाता है.
निमाड़ क्षेत्र में पहले से ही मिर्च की खेती बड़े पैमाने पर होती है. अब खंडवा जिले के कई किसान भी इसे अपनाकर अच्छी आय ले रहे हैं. सही तकनीक, उर्वरक प्रबंधन और बाजार की समझ के साथ हरी मिर्च की खेती किसानों की जेब में हर महीने पैसा ला सकती है.