कान्हा के बाघों पर शेरनियों की नजर! पहले 6, अब 15, इस गांव की बेटियां बनीं पहचान, जंगलों म

कान्हा के बाघों पर शेरनियों की नजर! पहले 6, अब 15, इस गांव की बेटियां बनीं पहचान, जंगलों म


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Women’s Day Special: कान्हा नेशनल पार्क में कई महिलाएं वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही हैं. पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस क्षेत्र में ये महिलाएं घने जंगलों में ड्यूटी कर न सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, बल्कि दुनिया को कान्हा की गौरवगाथा भी बता रही हैं. विश्व महिला दिवस के मौके पर उनकी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है.

Women’s Day Special: ये कहानी न सिर्फ वनों की रक्षा की नहीं बल्कि उस सम्मान को हासिल करने की भी है, जहां पर सालों से पूरुष प्रधान समाज का दबदबा रहा है. ऐसा माना जाता था कि वनों की देखभाल सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं लेकिन विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा में कई महिलाएं तैनात है. ऐसे में विश्व महिला दिवस के मौके पर लोकल 18 उन महिलाओं की कहानी जानी, जो न सिर्फ घने जंगलों में अपनी नौकरी कर रही है बल्कि दुनिया को कान्हा की गौरव गाथा भी बता रही है.

कान्हा नेशनल पार्क में महिला गाइड
कान्हा नेशनल पार्क से 150 से ज्यादा गाइड हैं, लेकिन इनमें भी सिर्फ 15 महिलाएं हैं. ये महिलाएं मुक्की गांव की रहने वाली महिलाए गाइड के रूप में काम कर रही है. ऐसे में शुरू में सिर्फ 6 महिलाओं को साल 2011 में वन विभाग ने टूरिस्ट गाइड के तौर पर चुना था. साथ ही उन्हें ट्रेनिंग भी दी गई. धीरे-धीरे महिला टूरिस्ट गाइड की संख्या बढ़ी, लेकिन सिर्फ सात. उन्हीं में से एक हैं धंती मरावी, जो साल 2011 से टूरिस्ट गाइड का काम रही हैं. फिलहाल में 13 महिला गाइड मुक्की गेट, 1 खटिया गेट और 1 सरही गेट पर अपनी सेवाएं दे रही हैं. इन महिलाओं के लिए यह रोजगार का महत्वपूर्ण अवसर बन गया है, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर आत्मनिर्भर बन रही हैं.

रोजगार के साथ मिला आत्मसम्मानन
महिला गाइड बनने के बाद इन महिलाओं को समाज में नई पहचान और सम्मान मिला है. अब वे परिवार की आय में योगदान देने के साथ-साथ सामाजिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. यह पहल न केवल लैंगिक समानता को मजबूत कर रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकारों को भी नई दिशा दे रही है.

शुरुआत में आती थी समस्या 
टूरिस्ट गाइड ने बताया कि शुरुआत में समस्या आती थी. पढ़ाई किए थे, लेकिन प्रैक्टिकल में काफी अंतर होता है. ऐसे में शुरुआत में थोड़ी समस्या आई, लेकिन समय के साथ सब आसान लगने लगा. अंग्रेजी एक समस्या बनी. लेकिन अब उससे भी निपट रहे हैं. प्रमिला भी साल 2011 से बतौर टूरिस्ट गाइड का काम कर रही हैं. शुरुआत में झिझक थी, डर लगा लेकिन समय के साथ सब आसान होता गया. अपने गांव की बोली में पेड़ों और जीवों के नाम से जानते थे लेकिन बॉटनिकल नेम और अंग्रेजी नामों से समस्या थी.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

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