राजगढ़ जिला पंचायत की साधारण सभा की बैठक में सोमवार को बिजली कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधियों का खुला आक्रोश देखने को मिला। बैठक में फर्जी मुकदमों और मनमानी वसूली के आरोप लगाते हुए सर्वसम्मति से विभाग के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर उसे शासन को भेजने का निर्णय लिया गया है, वहीं 62 लाख रुपए के जुर्माने और ग्रामीण विकास फंड को लेकर भी चर्चा की गई। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित बैठक में सोमवार को पहली बार बिजली कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ सदस्यों का कड़ा रुख नजर आया। बैठक के दौरान बिजली कंपनी के एसई सुनील कुमार खरे, ब्यावरा के डीई प्रहलाद क्षेत्र सहित पूरे विभाग के कार्य व्यवहार को लेकर कड़ी नाराजगी जताई गई। जैसे ही बिजली कंपनी के कामकाज की समीक्षा का क्रम आया, कुरावर क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य खुर्शीद मेव ने प्रकरण रखते हुए कंपनी पर गलत कार्रवाई के आरोप लगाए। अध्यक्ष बोले- झूठे मामले बनाकर की जा रही अनलीगल वसूली जिला पंचायत अध्यक्ष चंदरसिंह सौंधिया ने सख्त लहजे में कहा, “बिजली कंपनी के अधिकारियों का रवैया जनप्रतिनिधियों, उपभोक्ताओं और किसानों के प्रति ठीक नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “विभाग लीगल-अनलीगल वसूली में लगा हुआ है और बिजली चोरी के नाम पर लोगों को बेवजह उलझाया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “कई ऐसे लोगों पर भी प्रकरण बना दिए गए, जिनके नाम जमीन या मोटर तक नहीं है। केवल ऊपर अधिकारियों की पीठ थपथपवाने और प्रशंसा पाने के लिए उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है, जो बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।” सर्वसम्मति से पारित हुआ निंदा प्रस्ताव अध्यक्ष सौंधिया के साथ ही अन्य जिला पंचायत सदस्यों ने भी बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। इसके बाद सभी सदस्यों की सहमति से बिजली कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में राजगढ़ विधायक अमर सिंह यादव, खिलचीपुर विधायक हजारीलाल दांगी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पर्वत यादव सहित सभी सदस्य और अधिकारी मौजूद रहे। 4 माह बंद क्रेशर पर 12 महीने का 62 लाख जुर्माना लगाने पर सवाल बैठक में अध्यक्ष चंदरसिंह सौंधिया ने मलावर के समीप ग्राम खेड़ी निवासी कृष्णपाल सिंह की क्रेशर मशीन पर लगाए गए जुर्माने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि जिस क्रेशर मशीन को कलेक्टर ने चार माह के लिए बंद किया था, उस पर पूरे 12 माह का 62 लाख रुपए का जुर्माना क्यों लगाया गया। अध्यक्ष ने इसे पूरी तरह से मनमानी कार्रवाई बताते हुए संबंधित अधिकारियों से बैठक में स्पष्ट जवाब मांगा। सुदूर सड़कों की स्वीकृति में जिपं सदस्यों की सहमति जरूरी बैठक में ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ के तहत आने वाले ग्रामीण विकास फंड को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। सदस्यों ने सुझाव दिया कि सुदूर सड़कों की स्वीकृति संबंधित क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य की सहमति से ही दी जानी चाहिए। सभी सदस्यों की सहमति के बाद इस संबंध में भी बैठक में एक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।
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