अशोकनगर जिले के करीला में तीन दिवसीय रंग पंचमी मेले के बाद सोमवार को दान राशि की गणना पूरी हो गई है। इस साल दान पेटियों से कुल 20 लाख 760 रुपए नकद और 40 हजार रुपए का एक चेक मिला है, जो बीते तीन सालों में सबसे कम है। इसके अलावा भक्तों ने माता जानकी को विदेशी मुद्राएं और अपनी अनोखी मन्नतें लिखीं ‘अर्जियां’ भी चढ़ाई हैं, जिनमें सरकारी नौकरी, जज बनने और मनपसंद शादी कराने की गुहार लगाई गई है। दान राशि की गिनती के लिए 80 पटवारी, 80 चौकीदार और नायब तहसीलदार रैंक के चार अधिकारी तैनात किए गए थे। सोमवार को गिनती का कार्य सुबह 10 बजे से शुरू होकर देर शाम तक चला। वहीं, प्रसाद के रूप में चढ़ाए गए नारियल एक लाख रुपए में नीलाम किए गए। इस वर्ष दानदाताओं ने पेटियों में नकदी के अलावा विदेशी मुद्रा भी अर्पित की है। इसमें अमेरिका, भूटान, नेपाल और थाईलैंड की करेंसी शामिल है। एक श्रद्धालु ने गुजरात स्थित जूनागढ़ रियासत कालीन चांदी का सिक्का भी दान किया है। मार्च में हो जाए शादी, रेणुका के घरवाले मान जाएं माता जानकी के दरबार में आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं कागज पर लिखकर ‘अर्ज़ी’ के रूप में माता के चरणों में अर्पित करते हैं। प्राप्त पत्रों में बड़ी संख्या उन युवाओं की है जो विवाह या प्रेम संबंध की सफलता के लिए गुहार लगा रहे हैं। एक युवक ने लिखा है कि उसकी और ‘रेणुका’ की शादी मार्च महीने के भीतर हो जाए और दोनों परिवारों के सदस्य मान जाएं। भाई के लिए मांगा जज का पद नरसिंहपुर जिले की माया ने अपने ‘मंगल दोष’ को समाप्त करने और एक सरकारी नौकरी वाले वर की कामना की है। कई पत्रों में युवाओं ने ‘पुलिस’, ‘रेलवे’, ‘सेना’ और सीआईएसएफ जैसी सरकारी नौकरियों में चयन होने की प्रार्थना की है। एक व्यक्ति ने अर्जी में स्वयं के ‘जज’ बनने और अपने भाई की नौकरी लगने की मन्नत मांगी है। कपड़े का धंधा नहीं चल रहा, माता फिर से खड़ा कर दें एक श्रद्धालु ने पत्र में लिखा, “घर में पैसा नहीं टिकता, हमें ऐसी बुद्धि और नौकरी दें कि हमारे सारे काम बन जाएं।” एक व्यापारी ने अपनी अर्जी में लिखा कि उसका कपड़े का धंधा बिल्कुल नहीं चल रहा है, माता उसे फिर से खड़ा करने में मदद करें। कई भक्तों ने माता-पिता के अच्छे स्वास्थ्य, परिवार की रक्षा और खेत की मेढ़ के पुराने जमीनी विवाद सुलझाने की विनती की है। मन्नत पूरी होने पर राई नृत्य और 51 कन्याओं के भोज का वचन भक्तों ने केवल मांगें ही नहीं रखी हैं, बल्कि मन्नत पूरी होने पर विशेष भेंट चढ़ाने का वचन भी दिया है। पत्रों में मन्नत पूरी होने पर 51 कन्याओं को भोज कराने और करीला के प्रसिद्ध ‘राई’ नृत्य का आयोजन करवाने की बात लिखी गई है। साथ ही मंदिर में घंटा दान करने और सवा लाख या 21000 रुपए की दान राशि भेंट करने जैसी प्रतिज्ञाएं भी की गई हैं। बीते 3 सालों में सबसे कम रहा चढ़ावा और नारियल की नीलामी करीला मंदिर पर रंगपंचमी मेला के दौरान आया यह चढ़ावा बीते तीन वर्षों में सबसे कम है। नारियल की नीलामी बोली भी अपेक्षा से कम रही। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में नकद 18.48 लाख, 2023 में 16.50 लाख, 2024 में 22.86 लाख और 2025 में 26.11 लाख रुपए नकद मिले थे। वहीं, नारियलों की नीलामी 2022 में 2.50 लाख, 2023 में 1 लाख, 2024 में 1.50 लाख और 2025 में 3.01 लाख रुपए में हुई थी, जबकि इस साल मात्र एक लाख में नीलामी हुई है।
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