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Animal Husbandry Scheme: पशुपालकों के लिए खुशखबरी. अगर आप महंगी नस्ल की गाय-भैंस नहीं खरीद सकते तो आप सरकार की इस योजना का लाभ उठाकर मात्र 100 रुपये में देसी नस्ल से ऊंची नस्ल की गाय-भैंस हासिल कर सकते हैं. जानें ये कृत्रिम गर्भाधान योजना…
Animal Husbandry: क्या सच में मात्र 100 रुपये उन्नत नस्ल की गाय या भैंस हासिल की जा सकती है? अगर आप पशुपालक हैं और आपके मन में ये सवाल है तो इसका जवाब हां है. दअरसल, मध्य प्रदेश सरकार की एक योजना पशुपालकों के लिए लाभदायक साबित हो रही है. पशु विभाग कृत्रिम गर्भाधान योजना से पशुपालकों को देसी नस्ल से ही उन्नत नस्ल की गाय, भैंस उपलब्ध करवा रहा है. इस योजना का लाभ ये है कि कम पैसे में न सिर्फ एक उन्नत नस्ल मिलती है, बल्कि दूध की मात्रा भी 1 से डेढ़ किलो बढ़ जाती है.
छतरपुर के पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी डॉ. मातादीन पटेल ने लोकल 18 को बताया कि पशु विभाग द्वारा कृत्रिम गर्भाधान योजना चलाई जा रही है. इसका लाभ पशुपालक उठा सकते हैं. इस योजना में आप घर बैठे ही पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान करा सकते हैं. इसके लिए पशुपालकों को अपनी गाय या भैंस को खूंटे से बांध कर रखना होता है, ताकि पता चले कि वह गर्भाधान की स्थिति में हैं या नहीं. जब आपकी गाय या भैंस रमा रही हो यानि लक्षण दिख रहे हों तो आप नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें. वहां से टीम घर आएगी. कृत्रिम गर्भाधान कर देगी.
तुरंत कराएं ये काम
डॉ. मातादीन ने आगे बताया, इस प्रकिया में जानवर को दिक्कत भी नहीं होती है. वह आसानी से कंसीव कर लेता है. अगर सही समय पर कृत्रिम गर्भाधान कराएंगे तो कंसीव ज्यादा होता है. कहने का मतलब है कि जब पशु गर्मी यानी रमा रहा हो तो तुरंत कृत्रिम गर्भाधान करा लें, ताकि कंसीव करने में आसानी हो.
दूध भी ज्यादा मिलेगा
डॉ. मातादीन ने बताया, कृत्रिम गर्भाधान से देसी नस्ल से ही एक उन्नत नस्ल पैदा होती है. ये उन्नत नस्ल देसी नस्ल से दूध भी ज्यादा देती है. इस नस्ल की गाय-भैंस का 1 से डेढ़ किलो दूध उत्पादन बढ़ जाता है. डॉक्टर के अनुसार, पशु चिकित्सा केंद्र में गाय में जर्सी, साहीवाल, गिर नस्लों का सीमन आता है. वहीं भैंसों में मुर्रा, भदावरी जैसी नस्लों का सीमन है.
तो फीमेल ही पैदा होगी
डॉ. मातादीन बताते हैं कि कृत्रिम गर्भाधान दो तरीके से होता है. पहले तरीके में फीमेल नस्ल ही पैदा होती है, यानी गाय में बछिया और भैंस में पड़िया ही पैदा होती है. इस प्रक्रिया को Sex Sorted Semen कहा जाता है. वहीं, दूसरे तरीके में सामान्य रूप से गर्भाधान कराया जाता है. लेकिन, इसमें मेल या फीमेल नस्ल दोनों के जन्म की संभावना रहती है. इस प्रक्रिया में 100 रुपए न्यूनतम चार्ज होता है, जिसे शासन शुल्क में जमा कर दिया जाता है. साथ में एंबुलेंस जाती है तो उसका 150 रुपए चार्ज लगता है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें