गर्मी की दस्तक के साथ ही पारा 37 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है, जिससे वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। बैतूल-परासिया स्टेट हाईवे पर प्राकृतिक जलस्रोत सूखने के कारण बंदरों का झुंड बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज है। हालात इतने बदतर हैं कि रेत से भरे डंपरों से सड़क पर टपकने वाले पानी को पीने के लिए दर्जनों बंदर तपते डामर पर उतर रहे हैं। जान जोखिम में डालकर हाईवे पर पानी चाटते इन बेजुबानों की तस्वीरें मानवीय संवेदनाओं को झकझोर रही हैं। यह स्थिति न केवल वन्यजीवों की प्यास बल्कि भीषण सड़क हादसों के खतरे को भी बढ़ा रही है। अब हाईवे किनारे जलपात्रों की व्यवस्था करना अनिवार्य हो गया है।
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