उज्जैन के टावर चौक पर दिनदहाड़े हुए मनीष मीणा हत्याकांड ने पूरे शहर को हिला दिया था। 18 अगस्त 2015 की सुबह ऑफिस जाते समय मनीष के सिर में बेहद करीब से गोली मारी गई थी। चार दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने दम तोड़ दिया।
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भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई इस वारदात ने पुलिस की नींद उड़ा दी थी। नाराज परिजन और व्यापारी सड़कों पर उतर आए। पुलिस पर हत्यारों को पकड़ने का जबरदस्त दबाव था। करीब दस दिन बाद पहला सुराग मिला और गोली चलाने वाले हनीफ को एक एनजीओ से पकड़ लिया गया।
पूछताछ में उसने अपने साथी रिजवान का नाम भी बता दिया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किया गया देसी कट्टा और बाइक भी बरामद कर ली।
असली सवाल अब भी बाकी था- आखिर मनीष की हत्या क्यों की गई? किसकी साजिश थी? आपसी रंजिश थी या इसके पीछे कोई बड़ा राज छिपा था? पढ़िए क्राइम फाइल्स पार्ट-2 में…
वारदात के दो साल पहले ही मनीष और मीनाक्षी की शादी हुई थी।
हनीफ ने लिया मनीष की पत्नी का नाम
पुलिस की पूछताछ में हनीफ ने मनीष की पत्नी मीनाक्षी का नाम भी लिया। शुरुआत में पुलिस को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। अब तक इतनी कहानी साफ थी कि हनीफ के साथ उस दिन बाइक पर रिजवान अंसारी था। बाइक रिजवान चला रहा था और हनीफ बाइक के पीछे बैठा था।
पत्नी मीनाक्षी, मनीष को टावर चौक के पास स्थित वसावड़ा पेट्रोल पंप के पास छोड़कर निकली और मनीष पेट्रोल पंप के पीछे वाली गली में पैदल ही जा रहा था। तभी बाइक पर रिजवान और हनीफ आए। हनीफ ने बेहद करीब से मनीष के सिर में गोली मारी।

वारदात के दिन 6 बार हुई हनीफ-मीनाक्षी की बात
हनीफ से मिले सुराग के बाद पुलिस ने मीनाक्षी को भी हिरासत में लिया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाले गए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
18 अगस्त को, जिस दिन मनीष की हत्या हुई, उस दिन हनीफ और मीनाक्षी के बीच छह बार फोन पर बातचीत हुई थी। यह कॉल 10:47, 10:55, 11:00, 11:18, 11:31 और 11:34 बजे हुई। जबकि हत्या सुबह करीब 10:30 से 11 बजे के बीच हुई थी।
इससे साफ हो गया कि वारदात के बाद भी दोनों लगातार संपर्क में थे। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से एक दिन पहले 17 अगस्त को दोनों के बीच अलग-अलग सिम से 13 बार बातचीत हुई थी।

गुमराह करने के लिए चोरी के कागजों से खरीदी सिम
जांच आगे बढ़ी तो साजिश की परतें भी खुलती चली गईं। सामने आया कि मीनाक्षी ने अपने प्रेमी हनीफ के साथ मिलकर ही पति मनीष की हत्या की साजिश रची थी।
पुलिस से बचने के लिए हनीफ ने अपने ही एनजीओ में काम करने वाले एक युवक के दस्तावेज चोरी कर उसके नाम से सिम कार्ड खरीदा था और उसी से मीनाक्षी से बात करता था।
उधर, मीनाक्षी ने भी एक ऐसी महिला के नाम से सिम ले रखी थी, जो मोबाइल का इस्तेमाल ही नहीं करती थी। दोनों लंबे समय से इन्हीं फर्जी सिम के जरिए संपर्क में थे, लेकिन आखिरकार उनका यह शातिर तरीका ज्यादा समय तक नहीं चल पाया।

मीनाक्षी को पुलिस ने हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की।
दोस्त से मांगकर लाया था बाइक
वारदात को अंजाम देने के लिए हनीफ अपनी कॉलोनी के एक दोस्त से कुछ देर के लिए बाइक मांगकर लाया था। उसने दोस्त से कहा था कि एक काम निपटाकर आता हूं।
इसके बाद वह रिजवान के साथ टावर चौक इलाके में पहुंचा। उधर पहले से बनी योजना के मुताबिक मीनाक्षी अपने पति मनीष को लाल रंग की स्कूटी से घर से लेकर निकली और वसावड़ा पेट्रोल पंप के पास उतार दिया।
इंजमाम के घर छिपाई पिस्टल
मीनाक्षी ने मनीष से कहा कि उसे बाजार में काम है और वह उसे ड्रॉप कर वहीं से लौट गई। मनीष पेट्रोल पंप के पीछे वाली गली में स्थित अपने ऑफिस की ओर पैदल जा रहा था।
इसी दौरान बाइक पर पहुंचे हनीफ और रिजवान ने उसे निशाना बनाकर गोली मार दी और मौके से फरार हो गए।

हाजिरी रजिस्टर से खुला दोनों का झूठ
गिरफ्तारी के बाद भी हनीफ और मीनाक्षी पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते रहे। पुलिस ने जब पूछा कि 18 अगस्त की सुबह वे कहां थे, तो हनीफ ने कहा कि वह एनजीओ में काम कर रहा था।
लेकिन, जब पुलिस ने एनजीओ का हाजिरी रजिस्टर खंगाला तो उसका झूठ सामने आ गया। उस दिन वह काफी देर से पहुंचा था, जबकि रजिस्टर में कांटछांट कर उसकी उपस्थिति सुबह 10:30 बजे दर्ज कर दी गई थी।
वहीं मीनाक्षी ने भी एनजीओ में फोन कर कहा था कि वह किसी काम से देर से आएगी, जबकि वह घर से पहले ही निकल चुकी थी। इन तथ्यों ने दोनों के बयानों में कई विरोधाभास उजागर कर दिए।
प्यार, शक और फिर साजिश
मनीष के पिता राधाकिशन मीणा ने पुलिस को बताया कि मनीष और मीनाक्षी चार साल से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं तो 19 नवंबर 2013 को उन्होंने प्रेम विवाह कर लिया था। मनीष उनका इकलौता बेटा था। एनजीओ में काम करने के दौरान मीनाक्षी और हनीफ के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं।

मीनाक्षी बोली- मनीष देता था मरवा देने की धमकी
मीनाक्षी ने पुलिस को बताया कि इस घटना के बाद मनीष हमेशा धमकी देता था कि उसका एक दोस्त जेल में है, जो जल्द छूटने वाला है। वह बाहर आते ही मीनाक्षी और हनीफ दोनों को मरवा देगा। बार-बार की धमकी से उसे लगा कि कहीं सच में मनीष उनकी हत्या न करा दे। इसी डर के चलते दोनों ने मनीष की हत्या की साजिश रच डाली।
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लवमैरिज के 2 साल बाद हत्या,पत्नी के जाते ही फायरिंग

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में इस बार बात उज्जैन के 10 साल पुराने चर्चित टावर चौक हत्याकांड की। रोज की तरह एक महिला अपने पति को ऑफिस के पास छोड़कर बाजार की ओर चली गई। युवक पैदल ही अपने ऑफिस की तरफ जा रहा था। तभी बाइक पर सवार दो बदमाश आए और उन्होंने उसके सिर में गोली मार दी। पढ़ें पूरी खबर…