शाजापुर विधानसभा के दो गांवों में बिजली कटौती को लेकर छिड़ा विवाद अब विधायक और अधिकारी की लड़ाई में बदल गया है। बुधवार शाम भाजपा विधायक अरुण भीमावद के समर्थकों ने बिजली कंपनी के कार्यपालन यंत्री (EE) के दफ्तर पर ताला जड़ दिया। यह सारा हंगामा फोन पर हुई बातचीत में बदतमीजी के बाद शुरू हुआ। बुधवार शाम करीब 4 बजे विधायक समर्थकों ने दफ्तर के कर्मचारियों को बाहर निकाला और गेट पर ताला लगा दिया। इसके बाद विधायक भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ बड़े अधिकारी (अधीक्षण यंत्री) के ऑफिस पहुंचे। वहां करीब दो घंटे तक हंगामा चलता रहा और अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगे। फोन पर हुई बहस पूरा मामला बिकलाखेड़ी और भदौनी गांवों की बिजली काटने से शुरू हुआ। विधायक अरुण भीमावद का कहना है कि जब उन्होंने इस बारे में कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर झा को फोन किया, तो अधिकारी ने सीधे जवाब देने के बजाय कहा कि मेरा ट्रांसफर करवा दो। विधायक ने आरोप लगाया कि अधिकारी विरोधियों के कहने पर बिजली काट रहे हैं और भेदभाव कर रहे हैं। अधिकारी का पक्ष: 20 लाख का बकाया दूसरी तरफ, कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर झा ने बताया कि गांव पर 20 लाख रुपए का बिल बकाया है, इसलिए तीन दिन से बिजली काट रखी है। विधायक ने फोन कर शादी के लिए बिजली चालू करने को कहा था, लेकिन बकाया होने के कारण मना कर दिया गया। अधिकारी ने माना कि उन्होंने विधायक से ट्रांसफर की बात कही थी क्योंकि उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। रिश्वत के भी लगे आरोप हंगामे के दौरान ही एक कॉलोनाइजर आलोक गुप्ता ने भी विधायक के सामने अधीक्षण यंत्री को शिकायत सौंपी। इसमें उन्होंने कार्यपालन यंत्री झा पर रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं। फिलहाल पूरे मामले में तनाव बना हुआ है और प्रशासन जांच की बात कह रहा है।
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