बैन से कैसे बचे अर्शदीप? जडेजा नहीं खेल पाए थे मैच! क्या होते हैं डीमेरिट अंक

बैन से कैसे बचे अर्शदीप? जडेजा नहीं खेल पाए थे मैच! क्या होते हैं डीमेरिट अंक


मैच के बाद अर्शदीप ने अपनी सफाई में कहा था कि वह विकेट पर मारना चाह रहे थे, मगर गेंद ने हवा में दिशा बदल दी और मिशेल को जा लगी, उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया.

2017 में भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट मैच के दौरान दूसरी पारी में जडेजा ने बॉल को श्रीलंकाई बैट्ससमैन की ओर फेंका. ऑन फील्ड अंपायरों ने इसे खतरनाक माना और जडेजा को लेवल-2 का दोषी माना था. इस गलती के लिए जडेजा को तीन डीमेरिट प्वाइंट दिए गए थे और 50 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना भी लगाया गया था, जबकि अर्शदीप लेवल-1 के दोषी थे.

जडेजा को श्रीलंका के खिलाफ मैच में तीन डीमेरिट प्वाइंट मिले थे. मगर जडेजा को इससे पहले अक्टूबर 2016 में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में भी तीन डीमेरिट प्वाइंट मिल चुके थे. ऐसा इसलिए क्योंकि उन पर पिच को अनावश्यक नुकसान पहुंचाने का आरोप था. आईसीसी के डीमेरिट प्वाइंट के लिए जो नियम है, उसके मुताबिक अगर 24 महीने में किसी खिलाड़ी को अगर 4 डीमेरिट प्वाइंट मिले तो खिलाड़ी पर एक टेस्ट या 2 वनडे मैच का प्रतिबंध लगाया जा सकता है. जडेजा 4 प्वाइंट की सीमा पार कर चुके थे.

आईसीसी मैदान पर खिलाड़ियों की गलत हरकतों को चार अलग-अलग स्तरों में बांटती है, यह इस बात पर तय होता है कि खिलाड़ी का व्यवहार कैसा था, गलती जानबूझकर की गई थी या नहीं और ये कितनी खतरनाक थी.

लेवल-1 : अगर खिलाड़ी अंपायर के फैसले पर असंतोष जताता है, अभद्र भाषा का प्रयोग करता है, अनावश्यक अपील करता है या खेल भावना के विरुद्ध कोई काम करता है तो उसे इसका दोषी पाया जाता है. इसकी सजा 50 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना तथा एक या दो डिमेरिट प्वाइंट दिए जाते हैं.

लेवल-2 : इसमें गंभीर गलतियां शामिल होती हैं, जैसे प्रतिद्वंद्वी के साथ जानबूझकर खिलाड़ी को टच किया, अंपायर की ओर आक्रामक तरीके से दौड़ाना. किसी खिलाड़ी पर खतरनाक तरीके से गेंद फेंकना आता है. इसका दोष्ज्ञी पाए जाने पर मैच फीस का 50 से 100 प्रतिशत तक जुर्माना होता है तीन या चार डीमेरिट प्वाइंट होते हैं.

लेवल-3: इसका दोषी खिलाड़ी को तब माना जाता है जब वह अंपायरों को डराता है, धमकी देता है. इसमें चार से बारह डीमेरिट प्वाइंट दिए जाते हैं और खिलाड़ी को कई मैचों के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है.

लेवल-4: यह सबसे गंभीर स्तर है, मैदान पर की गई किसी भी हिंसा और अंपायरों पर हमला शामिल हैं, इसमें कई मैचों के प्रतिबंध से लगकर आजीवन बैन तक की सजा हो सकती है.

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किसी भी बललेबाज की तरफ गेंद फेंकना लेवल-2 का उल्लंघन है, हालांकि ये मैदान के अंपायरों की रिपोर्ट पर निर्धारित होता है. अर्शदीप के ओवर के बाद में और मैच के बाद माफी मांगने तथा अंपायरों और रेफरी ने बातचीत के आधार पर ये माना कि गलती जानबूझकर नहीं की गई थी, इसीलिए इसे लेवल-1 का उल्लंघन मानते हुए अर्शदीप पर 15 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया और 1 डीमेरिट प्वाइंट दिया.

मैदान पर अगर कोई घटना होती है तो सबसे पहले ऑन फील्ड अंपायर की रिपोर्ट ली जाती है, इसके बाद थर्ड अंपायर की राय ली जाती है इसके बाद खिलाड़ी पर आरोप तय होते हैं. मैच रेफरी आईसीसी के पैनल का हिस्सा होता है, इसीलिए वह सभी साक्ष्यों, वीडियो फुटेज की समीक्षा करता है और प्रस्तावित दंड पर निर्णय लेता है. इसके बाद खिलाड़ी को सूचना दे दी जाती है, उसके पास जवाब देने का निश्चित समय होता है, अगर वह दंड स्वीकार कर लेता है तो सुनवाई नहीं होती है.



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