देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. महंगाई के इस दौर में एक बार टैंक फुल कराना भी आम आदमी के बजट पर बोझ बन रहा है. पेट्रोल की कीमत 90 से 105 रुपये प्रति लीटर और डीजल 80 से 95 रुपये तक पहुंच चुकी है. ऐसे में जब आप फ्यूल भराने जाते हैं, तो हर पैसा मायने रखता है. लेकिन कई पेट्रोल पंपों पर कर्मचारी छोटी-छोटी चालाकियों से ग्राहकों को धोखा देते हैं.
कभी मीटर पहले से चलता रहता है, कभी कम ईंधन दिया जाता है और कभी क्वालिटी में मिलावट हो जाती है. इससे न सिर्फ आपका पैसा बर्बाद होता है, बल्कि गाड़ी की परफॉर्मेंस भी प्रभावित होती है. बढ़ती कीमतों के बीच ये अतिरिक्त नुकसान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. इसलिए फ्यूल भराते समय पूरी सतर्कता बरतना जरूरी है. अगर आप इन 5 आसान लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे तो पेट्रोल पंप पर होने वाली ठगी से बच सकते हैं. इन्हें एक-एक कर जान लीजिए.
जीरो चेक करें
पेट्रोल पंप पर धोखाधड़ी से बचने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण तरीका है मीटर को जीरो पर चेक करना. फ्यूल भराने से पहले हमेशा सुनिश्चित करें कि डिस्पेंसर का मीटर 0.00 पर सेट हो. कई बार कर्मचारी जानबूझकर मीटर रीसेट नहीं करते और पिछले ग्राहक की बची रीडिंग से ही नया ट्रांजैक्शन शुरू कर देते हैं. इससे आप पैसे तो पूरा देते हैं, लेकिन ईंधन कम मिलता है. गाड़ी से उतरकर खुद मीटर देखें और कर्मचारी से कहें कि रीसेट करे. अगर मीटर पहले से चल रहा हो तो तुरंत मना करें.
ऑड अमाउंट चुनें
दूसरी महत्वपूर्ण बात है ऑड अमाउंट में फ्यूल भरवाना. हमेशा 100, 200 या 500 जैसे राउंड फिगर के बजाय 101, 203 या 507 रुपये जैसे विषम अमाउंट बताएं. राउंड नंबर में कर्मचारी आसानी से शॉर्ट फ्यूलिंग कर सकते हैं, क्योंकि कट-ऑफ आसान होता है. विषम अमाउंट में मीटर पर नजर रखना आसान हो जाता है और धोखा पकड़ना मुश्किल नहीं रहता. ये छोटी सी आदत आपको सैकड़ों रुपये सालाना बचा सकती है.
पूरी प्रोसेस पर नजर रखें
तीसरी बात है गाड़ी से उतरकर पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना. कार या बाइक में बैठे रहने की गलती कभी न करें. बाहर निकलें, पंप के पास खड़े होकर मीटर और नोजल दोनों पर नजर रखें. कई बार कर्मचारी आपको बातों में उलझाकर ध्यान भटकाते हैं और उसी दौरान मीटर तेज चलाते हैं या हैंडल दबाकर एयर लॉक क्रिएट करते हैं. अगर आप पास खड़े होंगे तो वे ऐसा करने की हिम्मत नहीं करेंगे.
सील चेक करें
चौथी जरूरी सावधानी नोजल और पंप की सील की जांच है. नोजल साफ हो और उस पर सरकारी कैलिब्रेशन सील लगी हो, ये देख लें. अगर सील टूटी या नोजल गंदा हो तो मिलावट का खतरा बढ़ जाता है. कुछ पंपों परकेरोसिन मिक्स किया जाता है. अगर संदेह हो तो दूसरे पंप पर जाएं. हमेशा अधिकृत और बड़े ब्रांड के पंप चुनें जहां, पारदर्शिता ज्यादा रहती है.
रसीद जरूर लें
पांचवीं और अंतिम बात है रसीद जरूर लेना और उसकी जांच करना. फ्यूल भरने के बाद प्रिंटेड बिल मांगें. उसमें मात्रा, अमाउंट, डेंसिटी और ट्रांजैक्शन डिटेल्स चेक करें. अगर कोई गड़बड़ी लगे तो तुरंत शिकायत करें. ऑयल कंपनी के टोल-फ्री नंबर या कंज्यूमर हेल्पलाइन 1915 पर कॉल करें। रसीद रखने से सबूत मिलता है और दोषी पंप पर कार्रवाई हो सकती है।
इन 5 बातों को आदत बना लें तो पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का बोझ कुछ कम हो जाएगा. सतर्कता ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है. अगली बार फ्यूल भराने जाएं तो इन टिप्स को याद रखें और दूसरों को भी बताएं. इससे न सिर्फ आपका नुकसान रुकेगा, बल्कि और लोगों में भी जागरूकता फैलेगी.