इतिहास का भंडार है हट्टा की बावड़ी, दिखती 3 राजवंशों की झलक, और 300 साल का रहस्य!

इतिहास का भंडार है हट्टा की बावड़ी, दिखती 3 राजवंशों की झलक, और 300 साल का रहस्य!


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History of Balaghat Hatta ki Bawri: मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में स्थित हट्टा बावड़ी करीब 300 साल पुरानी एक अनोखी अंडरग्राउंड ऐतिहासिक धरोहर है. यह बावड़ी 17वीं शताब्दी में नागपुर के राजा बुलंद शाह द्वारा बनवाई गई थी और इसका इस्तेमाल सैनिकों के ठहरने के लिए किया जाता था. इसकी दो मंजिला संरचना, सुंदर नक्काशी और अनोखी वास्तुकला इसे बेहद खास बनाती है. इस बावड़ी में हैहय, गोंड और भोंसले राजवंश की स्थापत्य कला की झलक भी देखने को मिलती है. आज यह जगह बालाघाट के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है जहां दूर-दूर से पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं.

MP Historical Places: बालाघाट प्राकृतिक और ऐतिहासिक रूप से काफी समृद्ध है. ऐसे में बालाघाट पर्यटन की दृष्टि से पर्यटकों  को अपनी ओर आकर्षित करता है. बालाघाट की ऐतिहासिक विरासत सदियों पुरानी है, जिसके प्रमाण हमें आज भी देखने को मिलते हैं. उन्हीं में से एक हट्टा की बावड़ी, जो बालाघाट जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर हट्टा नाम के गांव में स्थित है. यह अंडरग्राउंड बावड़ी है, जैसे-जैसे आप इसके नीचे उतरते हैं तब आपको इसकी भव्यता का एहसास होता है. धरोहर में आज आपको हम बता रहे है, उसी बावड़ी की कहानी…

300 साल से भी ज्यादा पुरानी बावड़ी
हट्टा की बावड़ी को 17वीं शताब्दी में वक्त बुलंद शाह ने बनवाया था, जो नागपुर के राजा हुआ करते थे. इतिहासकारों का मानना है कि  युद्ध और व्यापार के लिए इसी रास्ते से मंडला की ओर जाया करते थे. ऐसे में उन्होंने सैनिकों के रोकने और आराम करने के लिए बनाया था. इसके बाद इस बावड़ी की जिम्मेदारी हट्टे सिंह वल्के के पास आ गई. फिर उन्हीं के नाम पर गांव का नाम हट्टा पड़ा.

फिर जमींदारों के पास पहुंची ये बावड़ी
यह बावड़ी तीन राजवंशों के अधीन रही, जिसमें हैहय, गोंड और भोंसले राजवंश शामिल है. ऐसे में इस बावड़ी तीनों राजवंशों की स्थापत्य कला की कलाकृतियां दिखाई पड़ती है. इसके बाद यह बावड़ी अंग्रेजी शासन के जमींदार लोधी परिवार के पास पास पहुंची. वह साल था 1818, उन्हीं जमींदारों के वंशज प्रताप नगपुरे बताते हैं कि साल 1988 तक उनके परिवार इस बावड़ी की जिम्मेदारी ली. आखिरकार फरवरी 1988 में यह बावड़ी पुरातत्व विभाग के अधीन हो गई, जिसके बाद से इसकी सुरक्षा और सहेजने की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग के पास चली गई.

दो मंजिला बड़ी इमारत है ये बावड़ी
हट्टा की बावड़ी दो मंजिला संरचना है इसमें पहले तल पर 10 स्तंभ है, तो वहीं  निचले तल पर 8 स्तंभों पर आधारित बरामदे हैं. इस बावड़ी के प्रवेश द्वार पर चतुर्भुजी शिव और अंबिका देवी की सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है. ऐसा माना जाता है कि इस बावड़ी के भीतर एक गुप्त सुरंग थी, जो लांजी किले और मंडला किले से जुड़ी हुई थी, हालांकि अब इसे बंद कर दिया गया है.

संरक्षण पर उठाए सवाल
इतिहासकार वीरेंद्र सिंह गहरवार ने हट्टा की बावड़ी के संरक्षण पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना  है कि बावड़ी की स्थिति जर्जर हो रही है. वहीं, इसमें काफी पानी भी भर जाता है, जिसे खाली नहीं करने पर इमारत को ज्यादा नुकसान पहुंचेगा. ऐसे में बारिश के दिनों में संरक्षित करने की दरकार है. उन्होंने मांग की है कि सरकार को इसके संरक्षण पर खास ध्यान देना चाहिए.

दूर-दूर से आते हैं पर्यटक
इस दुर्लभ अंडरग्राउंड इमारत को देखने के लिए लोग न सिर्फ जिले भर से आते है बल्कि दूसरे राज्यों से भी आते हैं. ऐसे में अगर आप भी यहां जाना चाहते हैं, तो बालाघाट जंक्शन के बाद सड़क मार्ग से वहां पहुंच सकते हैं. वहीं, एयरपोर्ट के लिए नागपुर और जबलपुर के बाद सड़क मार्ग से पहुंचना पड़ेगा.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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