सिंहासा आईटी पार्क: 25 कंपनियां यूनिट लगा रहीं, पर अतिक्रमण और सुरक्षा व्यवस्था चुनौती – Indore News

सिंहासा आईटी पार्क:  25 कंपनियां यूनिट लगा रहीं, पर अतिक्रमण और सुरक्षा व्यवस्था चुनौती – Indore News




स्टार्टअप से लेकर 100 करोड़ सालाना टर्नओवर वाली 25 से ज्यादा कंपनियों वाला सिंहासा आईटी पार्क अतिक्रमण और परिवहन जैसी मूलभूत परेशानियों से जूझ रहा है। धार रोड पर सिरपुर तालाब से आगे बने इस आईटी पार्क में कंपनियां तो काम शुरू कर रही हैं, लेकिन यहां न प्रोफेशनल वर्कफोर्स है, न परिवहन और अन्य सुविधाएं। वर्तमान में 1500 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं और कंपनियों का टर्नओवर 500 करोड़ रुपए से अधिक है। सरकार द्वारा जिन कंपनियों को यहां पर प्लॉट लीज पर दिए गए हैं, शर्त के मुताबिक उन्हें अधिक से अधिक लोगों को रोजगार देना है। इसके लिए टारगेट भी दिए हैं, लेकिन आसपास के गांव से अकुशल कामगार मिल रहे हैं। आम लोगों के लिए यहां जाने के लिए बस या अन्य परिवहन का विकल्प नहीं है। खाने की डिलीवरी भी यहां नहीं हो पाती है। पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से रात में नशाखोरी रोकना भी चुनौती है। प्रदूषण, अतिक्रमण और परिवहन के अलावा यहां एप्रोच रोड की भी समस्या है। मेन रोड से दो रास्ते पार्क तक पहुंचते हैं, लेकिन वहां व्यवस्थित गेट नहीं है। पहला एप्रोच रोड बेहद संकरा है और दुकानों से बीच से निकलता है। इसे व्यवस्थित चौड़ा करना जरूरी है।
मप्र स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन का दूसरा प्रोजेक्ट है सिंहासा आईटी पार्क मप्र स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपी एसईडीसी) का इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स (परदेशीपुरा) के बाद यह दूसरा प्रोजेक्ट है। 2012 में इस आईटी पार्क का कॉन्सेप्ट बनाया गया। 2018-19 से यहां उद्योग आना शुरू हुए। यहां 112 एकड़ का कुल एरिया है। एक बिल्डिंग 80 हजार वर्ग फीट की है, जिसमें 4 फ्लोर हैं।
समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाकर समाधान खोजेंगे लघु उद्योग भारती की सिंहासा इकाई के अध्यक्ष अर्पित कंठाली और सचिव सिद्धार्थ धवले ने बताया परेशानियों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से बात करेंगे। प्रदूषण, अतिक्रमण और परिवहन से जुड़ी परेशानी दूर करना सबसे जरूरी है। इस प्रकार की समस्याओं को उठाने के लिए यहां मौजूद कंपनियों ने लघु उद्योग भारती की इकाई का गठन किया है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर समाधान खोजा जा सके।
भास्कर इनसाइट 3 बड़े को-वर्किंग स्पेस बन रहे
सिंहासा आईटी पार्क में 53 प्लॉट हैं। 42 आवंटित हो चुके हैं। बाकी पर अतिक्रमण है। जो 25 कंपनियां काम कर रही हैं, उनमें से आधी से ज्यादा प्रोडक्ट निर्माता कंपनियां हैं। 3 को-वर्किंग स्पेस बन रहे हैं। इनमें स्प्लैश आईटी पार्क, 5 एक्सेपशन्स और आइडियल आईटी पार्क शामिल हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने भी अपना सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर 5 हजार वर्गफीट में शुरू किया है। आईआईटी इंदौर के इन्क्यूबेशन सेंटर दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन द्वारा भी यहां सिमुलेशन लैब और को-वर्किंग स्पेस बनाया जा रहा है। अधिकतर प्लॉट पर टेक उद्योग अपनी-अपनी फैक्टरी बना रहे हैं।



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