मध्य प्रदेश के ग्वालियर नगर निगम में शहर के विकास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर पेश किए गए बजट पर सियासी घमासान देखने को मिला। महापौर डॉ. शोभा सिंह सिकरवार द्वारा पेश किए गए 2391 करोड़ रुपये के बजट पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। बीजेपी और कांग्रेस पार्षदों द्वारा कुल 14 संशोधन प्रस्ताव भी लगाए गए थे, जिनमें से 4 को अस्वीकार करते हुए सभापति ने अंततः बजट को पारित कर दिया। कभी टमटम से आईं थी और अब स्कॉर्पियो से, विकास किसका हुआ ?
सदन की कार्यवाही के दौरान बीजेपी पार्षद ब्रजेश श्रीवास ने महापौर के बजट को लेकर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने महापौर की दो तस्वीरें सदन में लहराईं। एक तस्वीर वर्ष 2024 की थी, जब महापौर टमटम (इलेक्ट्रिक व्हीकल) से बजट पेश करने आई थीं, जबकि दूसरी तस्वीर वर्ष 2026 की थी, जिसमें वे स्कॉर्पियो गाड़ी से उतरते हुए दिखाई दे रही थीं। श्रीवास ने तंज कसते हुए कहा कि जब नगर निगम की आर्थिक स्थिति ठीक थी, तब महापौर इलेक्ट्रिक वाहन से आकर निगम की सादगी का दिखावा कर रही थीं, लेकिन अब जब निगम की हालत खराब है तो वे महंगी गाड़ी से बजट पेश करने पहुंच रही हैं। उन्होंने बजट को खोखला बताते हुए निगम की आर्थिक स्थिति को अब तक का सबसे खराब दौर बताया। इतिहास में पहली बार इतनी खराब स्थिति में नगर निगम
वहीं नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने भी निगम की आर्थिक स्थिति को लेकर सत्ताधारी कांग्रेस और महापौर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नगर निगम के इतिहास में पहली बार आर्थिक स्थिति इतनी खराब हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम को अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर लोन लेना पड़ रहा है, जबकि एफडी को सामान्यतः आपात स्थिति के लिए सुरक्षित रखा जाता है और उसे तोड़ा नहीं जाता। उनके मुताबिक यह वित्तीय प्रबंधन की बड़ी विफलता है। महापौर ने किया आरोपों को खारिज
हालांकि महापौर डॉ. शोभा सिंह सिकरवार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बजट शहर के विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सवाल उठाना है, इसलिए वे हर मुद्दे पर उन्हें निशाना बनाते हैं।
नगर निगम के इस बजट में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की गई है। करोड़ों के होंगे विकास कार्य
इसमें शहर में आवारा स्वानों के लिए 5 शेल्टर हाउस बनाने की योजना शामिल है। पेयजल और सीवर व्यवस्था के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें निगम को 25 से 30 प्रतिशत राशि वहन करनी होगी। इसके अलावा सड़कों और नालियों के निर्माण पर 500 करोड़ रुपये तथा जनकार्य मद में सड़क, डामर, आरसीसी और नालियों पर 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पेयजल व्यवस्था में खर्च होंगे 900 करोड़
सामुदायिक भवन और पार्क विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पानी की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें चंबल नदी के कोतवाल बांध से पानी लाने की योजना पर 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं वार्ड 61 से 66 में पेयजल व्यवस्था सुधारने और नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 450 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। फिलहाल बजट पारित हो चुका है, लेकिन सदन में हुई तीखी बहस ने साफ कर दिया है कि नगर निगम की राजनीति आने वाले समय में और गर्माने वाली है। अब देखना होगा कि महापौर द्वारा घोषित योजनाएं जमीन पर कब तक उतर पाती हैं।
Source link