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Shivpuri Mahua River History: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की महुअर नदी की शुरुआत एक छोटे से गांव महुआ मुहासा से मानी जाती है, जहां कभी महुआ के पेड़ की जड़ से पानी की एक छोटी धारा निकलती थी. समय के साथ यही धारा आगे बढ़ते-बढ़ते एक बड़ी नदी का रूप ले चुकी है और आज कई गांवों के लिए जीवनदायिनी बन गई है. इस नदी के पानी से न केवल लोगों की प्यास बुझती है बल्कि हजारों किसानों की खेती भी इसी पर निर्भर है. महुअर नदी पर बने नावली डैम से करीब 22 हजार किसानों की 9.5 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होती है. छोटी सी शुरुआत से बड़ी नदी बनने की यह कहानी इलाके के लोगों के लिए आज भी गर्व और आस्था का विषय है.
Shivpuri News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के खनियाधाना इलाके में बहने वाली महुअर नदी आसपास के गांवों के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती. यह नदी न सिर्फ लोगों की प्यास बुझाती है बल्कि हजारों किसानों की खेती का सहारा भी बनी हुई है.
लेकिन बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर इतनी बड़ी नदी की शुरुआत कहां से हुई. जब इस बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली गई तो पता चला कि महुअर नदी का उद्गम शिवपुरी जिले के महुआ मुहासा गांव से हुआ है.
महुआ के पेड़ की जड़ से निकली थी छोटी धारा
स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक कई साल पहले उस जगह पर एक बड़ा महुआ का पेड़ हुआ करता था. उसी पेड़ की जड़ के पास से धीरे-धीरे पानी निकलना शुरू हुआ. शुरुआत में वह बस एक छोटी सी धारा थी. समय के साथ यह धारा आगे बढ़ती गई और धीरे-धीरे एक नदी का रूप ले लिया. आज भले ही वह महुआ का पेड़ वहां नहीं है, लेकिन जिस जगह से पानी निकलता था वहां आज भी नदी की पतली धारा दिखाई देती है.
कई गांवों की प्यास बुझाती है यह नदी
महुआ मुहासा गांव से निकलने के बाद महुअर नदी कई गांवों से होकर गुजरती है. यह नदी मायापुर, मोतीपुर, भूबरा और बनियानी जैसे गांवों से होते हुए आगे करैरा और नरवर क्षेत्र तक पहुंचती है. गर्मी के मौसम में जब कई तालाब और छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब भी महुअर नदी का पानी कई गांवों के लोगों के काम आता है. इसलिए इलाके के लोग इसे अपनी जीवनदायिनी नदी मानते हैं.
हजारों किसानों की खेती का सहारा
महुअर नदी का महत्व सिर्फ पीने के पानी तक सीमित नहीं है. यह नदी किसानों की खेती के लिए भी बेहद जरूरी है. महुअर नदी पर बने नावली डैम के जरिए आसपास के कई गांवों में सिंचाई होती है. इस डैम से करीब 26 गांवों के लगभग 22 हजार किसानों को फायदा मिलता है और करीब 9.5 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई की जाती है. इससे किसानों को समय पर पानी मिल जाता है और उनकी फसल अच्छी होती है.
सिंध नदी की सहायक नदी भी है महुअर
महुअर नदी आगे चलकर सिंध नदी की सहायक नदी के रूप में जानी जाती है. इसी वजह से इसका जल प्रवाह काफी बड़े इलाके तक पहुंचता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह नदी नहीं होती तो इलाके के कई गांवों में पानी की समस्या खड़ी हो जाती.
आज भी खास है वह जगह
महुआ मुहासा गांव के पास वह जगह आज भी लोगों के लिए खास मानी जाती है, जहां से महुअर नदी की शुरुआत मानी जाती है. एक छोटे से पेड़ की जड़ से निकली पतली सी धारा आज एक बड़ी नदी बन चुकी है और हजारों लोगों की जिंदगी को सहारा दे रही है. यही वजह है कि इलाके के लोग महुअर नदी को अपनी जीवनरेखा मानते हैं.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें