खंडवा के डॉक्टर का अनोखा प्रयास, 128 परिवारों को दवा के साथ गीता की सौगात, मरीजों को मिली

खंडवा के डॉक्टर का अनोखा प्रयास, 128 परिवारों को दवा के साथ गीता की सौगात, मरीजों को मिली


Unique Initiative: चिकित्सा जगत में अक्सर कहा जाता है कि डॉक्टर दवा देता है और ईश्वर ठीक करता है. लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा में एक डॉक्टर इस सोच को एक कदम आगे बढ़ा रहे हैं. यहां डॉ. अनिल पटेल मरीजों का इलाज दवाइयों से तो करते ही हैं, साथ ही उन्हें श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर मानसिक शांति का रास्ता भी बताते हैं.पिछले करीब दो सालों में डॉ. पटेल अब तक 128 परिवारों को मुफ्त गीता भेंट कर चुके हैं और कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं.

कोरोना काल से शुरू हुई पहल
Local18 से बातचीत में डॉ. अनिल पटेल बताते हैं कि कोरोना काल के दौरान जब लॉकडाउन लगा था, तब उन्हें गीता पढ़ने का समय मिला. उसी दौरान एक महिला मरीज उनके पास आई, जो पढ़ी-लिखी होने के बावजूद जीवन में तनाव और परेशानियों से जूझ रही थी. महिला ने बताया कि अच्छी नौकरी और पैसे होने के बाद भी जीवन में शांति नहीं मिल रही है. तब डॉ. पटेल ने उन्हें श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ने की सलाह दी और एक प्रति भेंट की.

यहीं से शुरू हुआ सफर
डॉ. पटेल बताते हैं कि उस घटना के बाद उन्होंने महसूस किया कि कई लोग बाहर से ठीक दिखते हैं, लेकिन अंदर से तनाव और चिंता से घिरे रहते हैं. इसके बाद उन्होंने अपने मित्रों, परिचितों और गांव के लोगों को भी गीता भेंट करना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे यह पहल एक अभियान बन गई और अब तक वे 128 लोगों को गीता दे चुके हैं.

मानसिक तनाव का समाधान
डॉ. पटेल का मानना है कि आज के समय में कई बीमारियों की जड़ मानसिक तनाव, अकेलापन और जीवन में सही दिशा का अभाव है. ऐसे में गीता का ज्ञान लोगों को जीवन जीने का सही रास्ता दिखा सकता है. उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति गीता को पढ़कर उसके विचारों को जीवन में उतारता है, तो उसे मानसिक शांति मिलती है और जीवन के कई सवालों के जवाब भी मिल जाते हैं.

18 बार पढ़ने की सलाह
डॉ. पटेल बताते हैं कि गीता में 18 अध्याय हैं और अगर कोई व्यक्ति इसे कम से कम 18 बार पढ़े तो जीवन में कई समस्याओं का समाधान खुद ही समझ में आने लगता है। इससे आधुनिक जीवन और आध्यात्मिक सोच के बीच संतुलन बनता है.

लाभार्थियों ने बताया अनुभव
मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव विक्रम सिंह बताते हैं कि जब डॉ. पटेल ने उन्हें गीता भेंट की तो उन्हें लगा कि डॉक्टर सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं कर रहे, बल्कि उनके मन की चिंता भी दूर करना चाहते हैं. गीता पाठ से उन्हें अब काफी शांति महसूस होती है. वहीं, पीयूष गुप्ता का कहना है कि आज के दौर में जहां कई डॉक्टर मरीजों को समय नहीं दे पाते. वहीं डॉ. पटेल ने उन्हें जीवन जीने की नई दिशा दी है. उनके द्वारा दी गई गीता उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

दवा के साथ दुआ का संदेश
डॉ. पटेल का मानना है कि चिकित्सा विज्ञान शरीर का इलाज करता है, लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान आत्मा को मजबूत बनाता है. दवा के साथ गीता का यह अनोखा प्रयास न सिर्फ मरीजों का मनोबल बढ़ा रहा है, बल्कि समाज को भी यह संदेश दे रहा है कि स्वस्थ जीवन के लिए शरीर और मन दोनों का संतुलन जरूरी है.



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