LPG ने तो धो दी थी, हलवाई ने बचाई इज्जत! सिलेंडर नहीं मिलने पर बदला मेन्यू, भट्टी पर बनी य

LPG ने तो धो दी थी, हलवाई ने बचाई इज्जत! सिलेंडर नहीं मिलने पर बदला मेन्यू, भट्टी पर बनी य


Last Updated:

Bhopal News: भोपाल में गैस सिलेंडर की कमी का असर अब शादी समारोहों पर भी दिखने लगा है. एक रिसेप्शन में गैस नहीं मिलने के कारण पूरा खाना लकड़ी की भट्टी पर बनाना पड़ा और पहले से तय किया गया मेन्यू भी बदल दिया गया. करीब 1200-1500 मेहमानों के लिए पारंपरिक भोजन बनाकर स्वागत किया गया.

Zoom

गैस सिलेंडर की किल्लत का असर

शिवकांत आचार्य, 

Gas Cylinder Shortage Impact On Marriage: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों गैस सिलेंडर की किल्लत का असर आम लोगों के साथ-साथ शादी समारोहों पर भी दिखाई देने लगा है. हाल ही में शहर में आयोजित एक शादी में गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण पूरा खाना लकड़ी की भट्टी पर बनाना पड़ा और पहले से तय किया गया मैन्यू भी बदलना पड़ा. यह मामला भोपाल के स्वयंवर मैरिज गार्डन का है, जहां फूलमाली समाज के एक शादी समारोह का रिसेप्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस समारोह में करीब 1200 से 1500 लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई थी. शुरुआत में आयोजकों ने कई तरह के व्यंजन बनाने की तैयारी की थी, लेकिन अचानक गैस सिलेंडर नहीं मिलने की वजह से पूरा प्लान बदलना पड़ा.

18 से 20 गैस सिलेंडर की थी जरूरत
दूल्हे रोहित माली ने बताया कि रिसेप्शन के लिए 18 से 20 गैस सिलेंडर की जरूरत थी, क्योंकि मेहमानों के लिए अलग-अलग प्रकार के व्यंजन बनाने का प्लान था. लेकिन कार्यक्रम से एक दिन पहले तक गैस सिलेंडर की व्यवस्था नहीं हो सकी. ऐसे में परिवार और आयोजकों ने मिलकर तुरंत फैसला लिया कि बिना गैस के बनने वाले पारंपरिक व्यंजन बनाए जाएंगे.

रातों-रात सामग्री का इंतजाम
इसके बाद रातों-रात दाल-बाफले बनाने के लिए जरूरी सामग्री का इंतजाम किया गया. अगले दिन पूरे भोजन को गैस चूल्हे की जगह लकड़ी की भट्टी पर तैयार किया गया. बड़ी मात्रा में दाल और बाफले बनाए गए ताकि सभी मेहमानों को समय पर खाना मिल सके. आयोजकों के मुताबिक, गैस की कमी के कारण मजबूरी में मैन्यू बदलना पड़ा, लेकिन दाल-बाफले बनने से मेहमानों को पारंपरिक स्वाद भी मिला. कई मेहमानों ने लकड़ी की भट्टी पर बने खाने की तारीफ भी की.

बता दें, इन दिनों गैस सिलेंडर की कमी के कारण होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग से जुड़े लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई जगहों पर खाना बनाने के लिए लकड़ी या कोयले की भट्ठियों का सहारा लिया जा रहा है. भोपाल की इस शादी ने दिखा दिया कि सिचुएशन चाहे जैसी हों, भारतीय परिवार हर हाल में कार्यक्रम को सफल बनाने का रास्ता कहीं न कहीं से निकाल ही लेते हैं.

About the Author

Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



Source link