Last Updated:
Cucumber Cultivation Tips: इन दिनों बहुत से किसान खीरे की खेती कर रहे हैं. इस सीजन में खीरे की डिमांड भी खूब होती है. लेकिन, एक मक्खी खीरे की खेती को तबाह कर सकती है. देखते ही देखते पूरी फसल सुखा सकती है. जानें इस मक्खी का सटीक इलाज…
Kheera Kheti: देश के कई राज्यों में गर्मी के सीजन में खीरे की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. लेकिन, इस फसल पर इन दिनों सोना मक्खी (पीली मक्खी) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. मध्य प्रदेश में शिवपुरी के किसान भी कुछ ऐसी ही समस्या से जूझ रहे हैं. किसान बताते हैं कि यह मक्खी फसल को बहुत कम समय में नुकसान पहुंचा देती है, जिससे पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. ऐसे में किसानों को रोजाना खेत में जाकर फसल की निगरानी करना बेहद जरूरी हो गया है.
जहां डंक मारा, वहां से पौधा सूखा
किसानों के अनुसार, सोना मक्खी (पीली मक्खी) पत्तियों, फूलों और छोटे फलों पर डंक मारती है. जिस स्थान पर यह डंक लगाती है, वहां से पौधा धीरे-धीरे सूखने लगता है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो कुछ ही दिनों में पूरी फसल खराब हो सकती है. मक्खी का खतरा सुबह और शाम के समय में ज्यादा होता है.
नियमित देखभाल और छिड़काव जरूरी
शिवपुरी के किसान हरीराम सिंह कुशवाहा बताते हैं कि वह बचपन से ही खेती से जुड़े हैं और सीमित जमीन में भी अच्छी आमदनी कर रहे हैं. उनके परिवार में 12 सदस्य हैं, जिनका पालन-पोषण मात्र दो बीघा जमीन से हो रहा है. वे बताते हैं कि एक बीघा में खीरे की खेती से करीब एक लाख रुपये तक की आमद हो जाती है, जबकि दो बीघा में यह कमाई दो लाख रुपये तक पहुंच जाती है. हरीराम का कहना है कि खीरा की फसल में मुनाफा तो अच्छा है, लेकिन इसके लिए नियमित देखभाल जरूरी है. खासकर सोना मक्खी (पीली मक्खी) से बचाव के लिए समय-समय पर दवा का छिड़काव और फसल की निगरानी करना बहुत जरूरी है, तभी किसान इस फसल से अच्छा लाभ कमा सकते हैं.
खीरे में किस दवा का करें स्प्रे?
सोना मक्खी (पीली मक्खी) के नियंत्रण के लिए किसान कुछ प्रभावी कीटनाशकों का उपयोग कर सकते हैं. इसमें इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल या थायमेथोक्साम 25 डब्ल्यूजी का छिड़काव फायदेमंद माना जाता है. जैविक उपाय के रूप में नीम तेल (नीम ऑयल) 5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है. छिड़काव सुबह या शाम के समय करें ताकि दवा का असर ज्यादा हो. लगातार एक ही दवा का उपयोग न करें, बल्कि दवाओं को बदल-बदल कर प्रयोग करें। इससे कीटों में प्रतिरोधक क्षमता नहीं बनती और फसल सुरक्षित रहती है.
कितने दिन में सूख जाएगा पौधा
अगर सोना मक्खी (पीली मक्खी) का प्रकोप ज्यादा हो जाए और समय पर नियंत्रण न किया जाए तो खीरा का पौधा 5 से 7 दिनों के अंदर सूखना शुरू हो जाता है. शुरुआत में पत्तियां मुरझाने लगती हैं, फिर धीरे-धीरे पूरा पौधा पीला होकर कमजोर हो जाता है. डंक वाली जगह से सड़न भी शुरू हो सकती है, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है. अधिक प्रकोप की स्थिति में पूरी बेल 10 से 12 दिनों में खत्म हो सकती है. इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि जैसे ही लक्षण दिखाई दें, तुरंत उपचार करें और नियमित निगरानी बनाए रखें.
About the Author
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें