24 साल पहले क्राइस्टचर्च में आया था तूफान, 217 मिनट में बना अजेय रिकॉर्ड

24 साल पहले क्राइस्टचर्च में आया था तूफान, 217 मिनट में बना अजेय रिकॉर्ड


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24 साल पहले क्राइस्टचर्च में आया था तूफान, 217 मिनट में बना अजेय रिकॉर्ड

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न्यूज़ीलैंड की टीम 333 रन पर 9 विकेट खो चुकी थी और हार लगभग तय थी लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा ही बदल दी. 16 मार्च 2002 को एक ऐसा रिकॉर्ड बना जो आज तक कोई भी बल्लेबाज उसको नहीं तोड़ पाया. 

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न्यूजीलैंड के बल्लेबाज नाथन एस्टल ने 2002 में बनाया सबसे तेज दोहरा शतक, रिकॉर्ड आज भी बरकरार

नई दिल्ली. क्रिकेट के इतिहास में कुछ पारियां ऐसी होती हैं, जो स्कोरकार्ड से कहीं आगे जाकर दास्तान बन जाती हैं जुनून, जज्बे और असंभव को संभव बनाने की कहानी.नॉथन एस्टल की वह विस्फोटक पारी भी कुछ ऐसी ही थी, जब हार के मुहाने पर खड़ी टीम के बीच उन्होंने अकेले दम पर तूफान खड़ा कर दिया. क्राइस्टचर्च के मैदान पर ऐसा करिश्मा हुआ जिसको देखकर दुनिया की आंखे खुली की खुली रह गई थी.

इंग्लैंड ने न्यूज़ीलैंड के सामने चौथी पारी में जीत के लिए 550 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य रखा था.  लक्ष्य इतना बड़ा था कि मुकाबला औपचारिकता सा लगने लगा था. न्यूज़ीलैंड की टीम 333 रन पर 9 विकेट खो चुकी थी और हार लगभग तय थी लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा ही बदल दी. 16 मार्च 2002 को एक ऐसा रिकॉर्ड बना जो आज तक कोई भी बल्लेबाज उसको नहीं तोड़ पाया.

जेड स्टेडियम में एस्टल का जलवा 

नंबर 5 पर बल्लेबाजी करने उतर  एस्टल ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए. उन्होंने अपना शतक मात्र 114 गेंदों में पूरा किया, जो उस समय के टेस्ट क्रिकेट के लिहाज से बेहद तेज था लेकिन असली विस्फोट इसके बाद हुआ शतक पूरा करने के बाद उन्होंने गियर बदला और अगली 100 रन सिर्फ 39 गेंदों में ठोक दिए यह किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के लिए दुःस्वप्न जैसा था. इस दौरान उनका साथ देने आए घायल क्रिस क्रेयन्स जो 10वें नंबर पर बल्लेबाजी कर रहे थे दोनों ने मिलकर सिर्फ 65 गेंदों में 118 रनों की साझेदारी कर डाली.  यह साझेदारी न सिर्फ रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुई, बल्कि यह दिखाती है कि क्रिकेट में आखिरी विकेट तक उम्मीद जिंदा रहती है.

गेंदबाजों की धुलाई और बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

एस्टल ने इंग्लैंड के प्रमुख गेंदबाजों एंडी कैडिक, मैथ्यू होगॉर्ड और फि्लंटाफ की जमकर धुनाई की.  खासकर कैडिक के एक ओवर में लगातार तीन छक्के जड़कर उन्होंने यह साफ कर दिया कि वह सिर्फ टिकने नहीं, बल्कि इतिहास रचने आए हैं. एस्टल ने अपनी रिकॉर्डतोड़ पारी के दौरान 28 चौके और 11 छक्के लगाए. इस पारी का सबसे बड़ा आकर्षण सिर्फ रन नहीं, बल्कि उसकी रफ्तार थी. एस्टल ने 153 गेंदों में दोहरा शतक पूरा किया, जो आज भी टेस्ट क्रिकेट का सबसे तेज दोहरा शतक है.  उन्होंने एडम गिलक्रिस्ट का रिकॉर्ड तोड़ा, और बाद में बेन स्टोक्स और वीरंद्र सहवाग  जैसे विस्फोटक बल्लेबाज भी इस आंकड़े को पार नहीं कर सके. आखिरकार एस्टल 222 रन बनाकर हॉगार्ड की गेंद पर आउट हुए और न्यूज़ीलैंड की पारी 451 रन पर सिमट गई.  टीम मैच जरूर हार गई, लेकिन एस्टल की यह पारी जीत से कहीं बड़ी साबित हुई.  यह सिर्फ एक दोहरा शतक नहीं था, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में आक्रामकता की नई परिभाषा थी जहां हालात चाहे कितने भी मुश्किल हों, एक खिलाड़ी अपने दम पर कहानी बदल सकता है .



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