विदिशा में अनुसूचित जाति कांग्रेस कमेटी ने आदिवासी वर्ग को उनकी जमीन का अधिकार दिलाने की मांग को लेकर सिर पर काले मटके रखकर स्वामी विवेकानंद चौराहे से कलेक्ट्रेट तक विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। आदिवासी वर्ग को उनकी जमीन का अधिकार दिलाने के लिए अनुसूचित जाति कांग्रेस कमेटी ने यह विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध जताने के लिए स्वामी विवेकानंद चौराहा से रैली की शुरुआत की। नारेबाजी करते हुए सभी प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान जिला अध्यक्ष जगन्नाथ अहिरवार और अन्य पदाधिकारियों ने विरोध के प्रतीक के तौर पर अपने सिर पर काला मटका रखा था। रामपुरा की 12.103 हेक्टेयर भूमि का मामला ज्ञापन में ग्राम रामपुरा की 12.103 हेक्टेयर भूमि से संबंधित एक लंबित मामले का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है। समिति ने प्रशासन को बताया कि इस भूमि के राजस्व अभिलेखों में कई विसंगतियां पाई गई हैं। वर्ष 2013 के रिकॉर्ड के अनुसार इस भूमि का स्वामित्व दर्ज था, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किए गए। समिति का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में किए गए इन बदलावों ने आदिवासी वर्ग के अधिकारों को प्रभावित किया है। राजस्व मंडल के आदेश का तत्काल हो पालन कांग्रेस कमेटी ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण पात्र हितग्राहियों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। ज्ञापन में राजस्व मंडल मध्यप्रदेश के 18 फरवरी 2026 के आदेश का तत्काल पालन करने की मांग की गई है। समिति ने संबंधित भूमि पर आदिवासी वर्ग को जल्द से जल्द कब्जा दिलाने की मांग रखी है। इसके साथ ही राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार कर आदिवासियों के अधिकार सुनिश्चित करने की बात कही गई है। कांग्रेस बोली- ‘पाप का घड़ा भर चुका है’ ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में न्यायालय द्वारा आदेश पारित किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रदर्शन के दौरान जिला अध्यक्ष जगन्नाथ अहिरवार और जिला कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता अरुण अवस्थी ने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, “पाप का घड़ा भर चुका है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में कांग्रेस सरकार द्वारा गरीबों को दिए गए पट्टों को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बदल दिया गया है। समिति ने चेतावनी दी है कि ऐसे फर्जी पट्टों को निरस्त कर जमीन पुनः पात्र लोगों को दी जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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