सतना. सपने बड़े हों तो हालात भी रास्ता नहीं रोक पाते. मध्य प्रदेश के सतना जिले के 27 वर्षीय देवेश यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसने संघर्षों के बीच अपने लिए एक नई पहचान बनाई है. कभी आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हुए देवेश आज सोशल मीडिया पर हजारों लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. दिन में गैस एजेंसी में डिलीवरी बॉय का काम और खाली समय में मोबाइल से वीडियो बनाना जैसी दोहरी मेहनत ने उन्हें धीरे-धीरे एक लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर बना दिया. आज उनके इंस्टाग्राम पर करीब डेढ़ लाख फॉलोअर्स हैं और उनकी रील्स के लाखों फैंस हैं. दिलचस्प बात यह है कि लोकप्रियता मिलने के बावजूद देवेश ने जमीन से जुड़ाव नहीं छोड़ा और आज भी उसी सादगी के साथ अपना काम करते हुए लोगों को हंसाने का काम जारी रखे हुए हैं.
देवेश यादव सतना के नई बस्ती नियर भल्ला फॉर्म क्षेत्र के निवासी हैं. उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं रही. घर में एक छोटी किराना दुकान है, जहां उनके माता-पिता बैठते हैं. पैसों की कमी के कारण देवेश को जल्दी काम की तलाश करनी पड़ी, जिसके चलते उन्होंने 12वीं के बाद कॉलेज के साथ-साथ ही काम पकड़ लिया. परिवार की मदद के लिए उन्होंने अलग-अलग छोटे-मोटे काम किए और आखिरकार एक गैस एजेंसी में डिलीवरी बॉय का काम शुरू कर दिया. हालांकि नौकरी के साथ-साथ उनके मन में कुछ अलग करने की चाह हमेशा रही. बचपन से ही उन्हें लोगों के बीच पहचान बनाने और कुछ नया करने का सपना था. यही सपना धीरे-धीरे उन्हें सोशल मीडिया की दुनिया की ओर ले गया.
मोबाइल बना पहचान का मंच
देवेश यादव ने लोकल 18 से कहा कि उन्होंने करीब 7 साल पहले वीडियो बनाना शुरू किया था. उस समय उनके पास सिर्फ सैमसंग का एक साधारण मोबाइल फोन था, जिसकी कैमरा क्वालिटी भी बहुत अच्छी नहीं थी. शुरुआत में वह केवल लिपसिंक वीडियो बनाते थे और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते थे. उस दौर में उन्हें ज्यादा रिस्पॉन्स नहीं मिलता था बल्कि कई लोग मजाक भी उड़ाते थे. दोस्तों और आसपास के लोग अक्सर कहते थे कि वीडियो बनाकर क्या मिलेगा लेकिन उन्होंने इन बातों को चुनौती की तरह लिया और लगातार वीडियो बनाते रहे. धीरे-धीरे उन्होंने अपने कंटेंट में बदलाव किया और खुद की आवाज में वीडियो बनाना शुरू कर दिया.
आलोचना के बावजूद नहीं थमे देवेश
देवेश ने कहा कि जब भी वह कहीं वीडियो बनाते थे, तो कई लोग हंसते थे और ताने भी मारते थे. कई दोस्तों ने उनका साथ छोड़ दिया और मजाक उड़ाया लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी. उनका मानना है कि अगर किसी को अपने सपने पूरे करने हैं, तो उसे आलोचनाओं से डरना नहीं चाहिए. वहीं कुछ ऐसे दोस्त भी रहे, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया. देवेश की टीम में उनके दोस्त हिमांशु और गोलू श्रीवास्तव भी शामिल हैं. यह तीन-चार दोस्तों की टीम मिलकर अलग-अलग विषयों पर वीडियो बनाती है और अपने देसी अंदाज से लोगों का मनोरंजन करती है.
वायरल वीडियो से मिली बड़ी पहचान
देवेश की कई रील्स सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं. शुरुआत में वह एडल्ट कॉमेडी कंटेंट भी बनाते थे और उनकी एक रील करीब 40 मिलियन व्यूज तक पहुंच गई थी. इसी वीडियो के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी पहचान मिली. हालांकि बाद में उन्होंने अपने कंटेंट की दिशा बदल दी. उन्होंने महसूस किया कि उनके ज्यादातर दर्शक युवा हैं, इसलिए अब वह साफ-सुथरी कॉमेडी और ट्रेंडिंग मुद्दों पर वीडियो बनाते हैं. उनका प्रयास रहता है कि हर ट्रेंड को अपने देसी अंदाज में लोगों के सामने पेश करें, जिससे लोग हंसें भी और जुड़ाव भी महसूस करें.
परिवार का मिला पूरा समर्थन
देवेश की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान रहा है. उनके माता-पिता ने हमेशा उनके इस काम का समर्थन किया और कभी उन्हें वीडियो बनाने से नहीं रोका. देवेश का मानना है कि अगर माता-पिता अपने बच्चों का साथ दें, तो वे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं. वह कहते हैं कि हर छोटे शहर के युवाओं को भी कंटेंट क्रिएटर बनने और पहचान बनाने का अधिकार है. जरूरत सिर्फ मेहनत, धैर्य और परिवार के समर्थन की होती है.
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी
आज देवेश यादव के इंस्टाग्राम पर करीब डेढ़ लाख फॉलोअर्स हैं और स्थानीय स्तर पर लोग उनके वीडियो को काफी पसंद करते हैं. गैस डिलीवरी का काम करने के बाद जो समय बचता है, उसी में वह अपने दोस्तों के साथ वीडियो बनाते हैं. देवेश का कहना है कि यह सफर आसान नहीं था लेकिन उन्होंने कभी रुकना नहीं सीखा. उनका सपना है कि आने वाले समय में वह और बेहतर कंटेंट बनाकर देशभर में अपनी पहचान बनाएं और लोगों को हंसाते रहें. सतना के एक साधारण युवक की यह कहानी आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है कि अगर मेहनत और आत्मविश्वास हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी सफलता हासिल की जा सकती है.