झाड़-फूंक से बिगड़ी प्रसूता की तबीयत, कोमा में गई: 5 बार डायलिसिस और एफएफपी चढ़ाकर बचाई जान, जच्चा-बच्चा सुरक्षित – Sagar News

झाड़-फूंक से बिगड़ी प्रसूता की तबीयत, कोमा में गई:  5 बार डायलिसिस और एफएफपी चढ़ाकर बचाई जान, जच्चा-बच्चा सुरक्षित – Sagar News




सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में भर्ती प्रसूता को एनेस्थीसिया और आईसीयू विभाग की टीम ने 15 दिन बाद सुरक्षित बचा लिया है। प्रसूता के साथ उसका बच्चा भी स्वस्थ है। बीएमसी के आईसीयू प्रभारी डॉ. सर्वेश जैन ने बताया कि खुरई के ग्रामीण इलाके की रहने वाली महिला गर्भावस्था के दौरान अचानक बेहोश हो गई थी। परिजनों ने अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया। जिससे प्रसूता की हालत गंभीर हो गई। तबीयत बिगड़ने पर परिजन बीएमसी लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने तत्काल जांच शुरू की। लेकिन तब तक प्रसूता कोमा में जा चुकी थी। डॉक्टर्स ने तुरंत प्रसूता को आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया। कोमा में इलाज के दौरान प्रसूता ने बच्चे को जन्म दिया। नवजात को नर्सरी में शिफ्ट किया गया।
15 दिन बाद कोमा से बाहर आई प्रसूता
लेकिन प्रसूता की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। किडनी फेलियर की स्थिति को देखते हुए 5 बार डायलिसिस किया गया। शरीर में सुधार के लिए 5 एफएफपी (फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा) चढ़ाए गए। डॉ. अजय सिंह, डॉ. अजमल, डॉ. ट्विंकल और डॉ. हिमानी की टीम ने दिन-रात निगरानी की। लगातार निगरानी और इलाज से 15 दिन बाद प्रसूता कोमा से बाहर आई। कोमा से बाहर आने पर प्रसूता का चेकअप किया गया।जिसमें वह पूरी तरह से स्वस्थ पाई गई। बुधवार को बीएमसी के डीन डॉ. पीएस ठाकुर ने कोमा में गई प्रसूता का बीएमसी में इलाज किया गया। इलाज के बाद प्रसूता और उसका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज में सकारात्मकता बढ़ेगी, तभी गरीबों का विश्वास बना रहेगा और डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा। बीएमसी में गरीब मरीजों को निःशुल्क और उत्कृष्ट इलाज मिल रहा है।



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