Last Updated:
Agriculture News: खंडवा में पहले महिलाएं ही सीमित स्तर पर मोटे अनाज की खेती कर रही थीं लेकिन अब पुरुष किसान भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं. कृषि विभाग की ट्रेनिंग और मदद से आने वाले समय में जिले में मिलेट्स की खेती का रकबा तेजी से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.
खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में अब एक बार फिर पारंपरिक मोटे अनाज (मिलेट्स/श्री अन्न) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो-कुटकी जैसे विलुप्त होते अनाजों को दोबारा खेतों तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग ने नई पहल शुरू की है. इसका उद्देश्य न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाना है बल्कि लोगों की थाली में पोषण भी बढ़ाना है. खंडवा कृषि विभाग ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कृषि मंडी में मिलेट्स मेले का आयोजन किया, जिसमें जिलेभर के किसान शामिल हुए. यहां कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को इन फसलों के फायदे, उन्नत तकनीक और बाजार की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इस दौरान कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग और स्व सहायता समूहों द्वारा कई स्टॉल भी लगाए गए, जिनका निरीक्षण एडीएम सृष्टि देशमुख ने किया. कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर नीतीश यादव ने लोकल 18 से कहा कि किसानों को हर स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे इन फसलों की खेती को सही तरीके से अपनाकर बेहतर उत्पादन और मुनाफा कमा सकें.
स्थानीय किसान सुभाष पटेल ने लोकल 18 से कहा कि 20 से 40 साल पहले ज्वार, बाजरा और रागी जैसी फसलें गांवों में आम थीं, जिन्हें ‘श्री अन्न’ कहा जाता था लेकिन धीरे-धीरे किसान इनसे दूर हो गए. अब एक बार फिर इन फसलों की ओर लौटना जरूरी हो गया है क्योंकि इनकी बाजार में अच्छी मांग है और ये स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं.
कम पानी-कम लागत और ज्यादा फायदा
मिलेट्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें कम पानी और कम खाद में भी आसानी से उगाया जा सकता है. ये फसलें सूखा सहन करने में सक्षम होती हैं, इसलिए बदलते मौसम और अनिश्चित बारिश के दौर में किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बन रही हैं. रागी (मडुआ) जैसी फसल लगभग 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है और अच्छी देखभाल के साथ 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन दे सकती है. यही कारण है कि इसे कम समय में बेहतर कमाई वाली फसल माना जा रहा है.
बीज और ट्रेनिंग की व्यवस्था
कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में 1125 बीज मिनीकिट किसानों को वितरित किए गए हैं, जिसके तहत लगभग 225 हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेट्स की खेती शुरू करवाई जा रही है. इसके साथ ही किसानों को बुवाई, सिंचाई, मिट्टी प्रबंधन और कीट नियंत्रण की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
बढ़ती मांग और बाजार की संभावना
आज के समय में मिलेट्स को सुपर फूड माना जा रहा है. शहरी क्षेत्रों में हेल्थ के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है. रेडी-टू-ईट उत्पाद, आटा मिश्रण और निर्यात बाजार में भी इनकी खपत बढ़ रही है. सरकार भी इन्हें बढ़ावा देने के लिए समर्थन मूल्य, बोनस और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. कई जगहों पर इन्हें मिड डे मील और आंगनवाड़ी में भी शामिल किया जा रहा है.
खंडवा में फिर बढ़ेगा रुझान
खंडवा में पहले महिलाएं ही सीमित स्तर पर इन फसलों की खेती कर रही थीं लेकिन अब पुरुष किसान भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं. कृषि विभाग की ट्रेनिंग और सहयोग से आने वाले समय में जिले में मिलेट्स की खेती का रकबा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. यह पहल न सिर्फ किसानों को कम लागत में ज्यादा मुनाफा दिलाने में मदद करेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों को पोषण से भरपूर ‘श्री अन्न’ भी उपलब्ध कराएगी.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.