कटनी में तीन दिव्य देवियां: जिनकी मान्यता शक्तिपीठों से कम नहीं – Katni News

कटनी में तीन दिव्य देवियां:  जिनकी मान्यता शक्तिपीठों से कम नहीं – Katni News




मध्य प्रदेश के कटनी जिले में तीन ऐसे दिव्य धाम हैं, जिनकी मान्यता भारत के 51 शक्तिपीठों से कम नहीं है। ये मंदिर विजयराघवगढ़ की मां शारदा, शहर की हृदयस्थली में विराजीं मां जालपा और ढीमरखेड़ा की रहस्यमयी महादेवी माता के हैं। ये तीनों स्थल न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि जिले की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर को भी संजोए हुए हैं। विजयराघवगढ़ की पहचान उसके ऐतिहासिक किले के साथ-साथ वहां विराजित मां शारदा से भी है। लोक मान्यता के अनुसार, यहां स्थापित माता मैहर वाली मां शारदा की बड़ी बहन हैं। बताया जाता है कि 1826 में राजा प्रयागदास मां शारदा को अपने साथ यहां लाए थे। 1857 की क्रांति के दौरान यह नगर वीरता का केंद्र था, और अंग्रेजों के हमले में मंदिर को क्षति भी पहुंची थी। वर्ष 1984 में मैहर के पंडा देवी प्रसाद के सान्निध्य में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। वर्तमान में यहां का राम बाग, भरत बाग और राजा का किला पर्यटकों और भक्तों को आकर्षित करता है। कटनी शहर के मध्य में स्थित मां जालपा का दरबार लगभग 250 साल पुराना है। यह मंदिर उस समय की याद दिलाता है, जब यह पूरा इलाका बांस के घने जंगलों से घिरा हुआ था। जनश्रुति के अनुसार, रीवा के बिहारीलाल पंडा को माता ने स्वप्न में संकेत देकर यहां बुलाया था। जंगल की सफाई के दौरान एक शिला प्रकट हुई, जिसे आज मां जालपा के रूप में पूजा जाता है। यहां 50 साल पहले जयपुर से लाई गई मां कालका और शारदा की प्रतिमाओं के साथ 64 योगिनियों की भी स्थापना की गई है।



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