नवरात्रि में जाएं खरगोन के ये 5 पवित्र स्थल, देशभर में चर्चित, लगती श्रद्धालुओं की भीड़

नवरात्रि में जाएं खरगोन के ये 5 पवित्र स्थल, देशभर में चर्चित, लगती श्रद्धालुओं की भीड़


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नवरात्रि में जाएं खरगोन के ये 5 पवित्र स्थल, देशभर में चर्चित

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Navratri Special: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को बहुत विशेष माना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु देवी के प्रमुख मंदिरों में बड़ी आस्था के साथ माथा टेकने जाते हैं. खरगोन में भी कुछ ऐसे ही दिव्य और चमत्कारी मंदिर है, जिनका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है और मान्यताओं को लेकर चर्चित है. देशभर से यहां नवरात्रि में भक्त दर्शन पूजन के लिए आते हैं. 

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होते ही पूरे देश में भक्ति का माहौल बन जाता है. हिंदू नववर्ष के साथ शुरू होने वाली इस नवरात्रि का खास महत्व माना जाता है. इन नौ दिनों में लोग मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और मंदिरों में जाकर दर्शन करते हैं.

खरगोन में भी नवरात्रि के दौरान खास रौनक देखने को मिलती है. यहां कई ऐसे प्राचीन और चमत्कारी मंदिर हैं, जिनकी मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है. हर साल नवरात्रि में हजारों श्रद्धालु इन मंदिरों में पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं.

पुरातन नगरी ऊन में स्थित महालक्ष्मी मंदिर जिले नहीं बल्कि भारत के सबसे खास मंदिरों में शामिल है. यह भारत के चार पुरातन मंदिरों में से एक है. जो 11वीं शताब्दी का बताया जाता है और यहां मां महालक्ष्मी की स्वयंभू मूर्ति कमल पर विराजित है. मान्यता है कि मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाकर मांगी गई मन्नत पूरी होती है. जब मनोकामना पूरी हो जाती है तो भक्त यहां सीधा स्वास्तिक बनाते हैं.

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पार्वती माता मंदिर जिले के अंतिम छोर पर विंध्याचल पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित है. पहले इसे विंध्यवासिनी माता के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब यह पार्वती माता के नाम से प्रसिद्ध है. यहां की प्रतिमा को अनोखा माना जाता है और कहा जाता है कि ऐसी प्रतिमा दुनिया में कहीं और नहीं है. श्रद्धालु मानते हैं कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

खरगोन के आशापुर गांव में मौजूद आशापुरी माता मंदिर का इतिहास पांडव काल से जुड़ा बताया जाता है. मान्यता है कि यहां अर्जुन ने तपस्या कर माता को प्रसन्न किया था. नवरात्रि में यहां हर दिन हजारों भक्त पहुंचते हैं और आसपास के गांवों से चुनरी चढ़ाई जाती है. लोग विश्वास करते हैं कि मां आशापुरी सभी की इच्छाएं पूरी करती हैं.

जयंती माता मंदिर बड़वाह क्षेत्र में चोरल नदी के किनारे घने जंगलों के बीच स्थित है. यह मंदिर बहुत प्राचीन माना जाता है और कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में युधिष्ठिर को यहीं से विजय का आशीर्वाद मिला था. नवरात्रि में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

भवानी माता मंदिर महेश्वर को 108 सिद्धपीठों में शामिल माना जाता है. यहां काले पत्थर से बनी मां भवानी की प्रतिमा और शेर की सवारी विशेष आकर्षण है. नवरात्रि में इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और माता को बड़ी साड़ी चढ़ाई जाती है, जो इस मंदिर की खास परंपरा है.



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