क्‍या है मध्‍य प्रदेश का आनंद विभाग? कैसे करता है काम, जानें डिटेल

क्‍या है मध्‍य प्रदेश का आनंद विभाग? कैसे करता है काम, जानें डिटेल


भोपाल. मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बना, जिसने विकास को केवल सड़क, बिजली और पानी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि नागरिकों की खुशहाली को भी शासन की प्राथमिकता बनाया. इसी सोच के तहत 2016 में आनंद विभाग की स्थापना की गई. यह विभाग नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य, आंतरिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए काम करता है. आज के दौर में जहां तनाव, अवसाद और प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां इस तरह का विभाग शासन की सोच में बड़ा बदलाव दर्शाता है. यही वजह है कि यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई.

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में यह विभाग आज भी सक्रिय है और राज्य आनंद संस्थान के जरिए अपने कार्यक्रम चला रहा है. इसका उद्देश्य केवल सरकारी योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक खुशी और संतुलन लाना है. भूटान के ‘ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस’ मॉडल से प्रेरित यह पहल यह मानती है कि विकास का सही पैमाना केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि नागरिकों की मानसिक और सामाजिक खुशहाली भी है.

आनंद विभाग की शुरूआत कब हुई?
आनंद विभाग का गठन अगस्त 2016 में किया गया था. तत्कालीन सरकार ने इसे एक अलग विभाग के रूप में स्थापित किया. बाद में कुछ समय के लिए इसे दूसरे विभाग में विलय किया गया, लेकिन फिर इसे स्वतंत्र पहचान दी गई. इसका उद्देश्य शासन के कामकाज में ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ को शामिल करना है.

आनंद विभाग कैसे काम करता है?
यह विभाग लोगों को आंतरिक खुशी के लिए प्रशिक्षित करता है. योग, ध्यान, कृतज्ञता और सकारात्मक सोच के जरिए लोगों को तनाव मुक्त रहने की तकनीक सिखाई जाती है. यह कार्यक्रम स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और गांवों तक पहुंचाए जाते हैं.

‘अल्पविराम’ कैसे मानसिक राहत देता है?
आनंद विभाग की सबसे खास पहल ‘अल्पविराम’ है. इसमें लोगों को कुछ मिनट शांत बैठकर खुद से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है. यह छोटी सी प्रक्रिया तनाव कम करने में मददगार मानी जाती है.

आनंद संस्‍थान के शिविर में क्‍या सिखाते हैं?
राज्य आनंद संस्थान के जरिए 6 दिन के शिविर आयोजित किए जाते हैं. इनमें प्रतिभागियों को जीवन कौशल और मानसिक संतुलन सिखाया जाता है. गांव और मोहल्लों में ‘आनंद क्लब’ बनाकर सामूहिक गतिविधियां भी कराई जाती हैं. अब तक प्रदेश में 1.41 लाख से अधिक लोग ‘आनंदक’ के रूप में पंजीकृत हो चुके हैं. ये लोग समाज में सकारात्मकता फैलाने का काम करते हैं और स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करते हैं.

आनंद विभाग का बजट कितना है और यह मॉडल क्‍यों खास है?
करीब 3.60 से 5 करोड़ रुपए के बजट में यह विभाग 8 करोड़ से ज्यादा आबादी तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है. कम संसाधनों में बड़े सामाजिक बदलाव की यह एक अनूठी पहल मानी जा रही है. यह विभाग दिखाता है कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक भी होना चाहिए. यही कारण है कि अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहे हैं.



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