नई दिल्ली (Sagar CMHO Dr Mamta Timori Retirement Controversy). मध्य प्रदेश के सागर जिले से बहुत हैरानी भरा मामला सामने आया है. सरकारी सिस्टम की लापरवाही का आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग अपनी एक बड़ी अधिकारी, सीएमएचओ डॉ. ममता तिमोरी को रिटायर करना ही भूल गया. मैडम पूरे दो साल तक बिना किसी कानूनी अधिकार के पद पर जमी रहीं, फाइल्स साइन करती रहीं और विभाग सोया रहा. फिर आनन-फानन में उन्हें जबरन रिटायर करने के आदेश जारी किए गए.
यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की कुर्सी का नहीं है, बल्कि उस पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान है, जहां रिटायरमेंट की तारीख तक दर्ज नहीं थी. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. ममता तिमोरी को 2024 में रिटायर हो जाना चाहिए था, लेकिन वह 2026 तक सेवा देती रहीं. यह मामला उजागर होते ही विभाग में हड़कंप मच गया है. साथ ही चर्चा हो रही है कि पिछले दो साल में उनके द्वारा लिए गए निर्णयों और किए गए भुगतानों का क्या होगा. क्या यह महज भूल है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है?
2 साल का बोनस कार्यकाल और सोया हुआ विभाग
नियमों के मुताबिक, सरकारी सेवा में उम्र पूरी होते ही अधिकारी को रिटायर हो जाना चाहिए. लेकिन सागर की मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. ममता तिमोरी के मामले में नियम हवा हो गए. वह मार्च 2024 में ही रिटायर होने वाली थीं, लेकिन विभाग की फाइल्स में उनकी जन्मतिथि का हिसाब शायद कोई देखना ही भूल गया. नतीजा यह हुआ कि वह 2026 तक अपनी कुर्सी पर शान से बैठी रहीं.
CMHO Dr Mamta Timori Retirement: डॉ ममता तिमोरी को आखिरकार जबरन रिटायर किया गया
अवैध कुर्सी और फाइलों पर दस्तखत
हैरानी की बात है कि इन दो सालों के दौरान डॉ. तिमोरी ने न केवल विभाग का कामकाज संभाला, बल्कि कई महत्वपूर्ण फाइलों पर साइन किए, नियुक्तियां देखीं और सरकारी बजट का प्रबंधन भी किया. तकनीकी रूप से रिटायरमेंट की तारीख के बाद उनकी तरफ से किए गए हर साइन को अवैध माना जा सकता है. अब सवाल यह उठ रहा है कि उनके कार्यकाल में हुए करोड़ों के लेन-देन का हिसाब कैसे तय होगा?
जब खुली नींद तो मची अफरा-तफरी
हाल ही में जब स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय में रिकॉर्ड्स चेक हुए, तब पता चला कि डॉ. ममता तिमोरी तो अतिथि बनकर विभाग चला रही हैं. आला अधिकारियों तक बात पहुंचते ही विभाग में खलबली मच गई. आनन-फानन में उनके रिटायरमेंट के आदेश टाइप किए गए और उन्हें तुरंत पद छोड़ने को कहा गया. इसे एक तरह का जबरन रिटायरमेंट माना जा रहा है क्योंकि वह खुद से कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थीं.
लापरवाही या कोई बड़ी सेटिंग?
सागर जैसे महत्वपूर्ण जिले में इतना बड़ा प्रशासनिक ब्लंडर होना सामान्य बात नहीं है. चर्चा है कि क्या वाकई यह मानवीय भूल थी या फिर डॉ. तिमोरी को पद पर बनाए रखने के लिए जानबूझकर फाइलों को दबाया गया था? स्थानीय स्तर पर भी कई बार उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे, लेकिन किसी ने उनके रिटायरमेंट की उम्र पर ध्यान नहीं दिया.
अब आगे क्या? जांच की आंच कहां तक?
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने आखिरकार इस अजब-गजब मामले की जांच शुरू कर दी है. उन क्लर्क्स और अधिकारियों की लिस्ट तैयार की जा रही है जिनकी जिम्मेदारी रिटायरमेंट लिस्ट अपडेट रखने की थी. इसके साथ ही, पिछले दो साल के वेतन और भत्तों की वसूली की संभावनाओं पर भी कानूनी राय ली जा रही है. अगर ऐसे होता है तो डॉ. ममता तिमोरी को भारी नुकसान हो सकता है.