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Agriculture News: कृषि अधिकारी संजय सिंह ने लोकल 18 से कहा कि जब दिन का तापमान 32 डिग्री से ऊपर चला जाता है, तो गेहूं के पौधों में प्रकाश संश्लेषण और पोषक तत्वों के संचार की प्रक्रिया पर असर पड़ता है.
सीधी. मध्य प्रदेश में मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही तापमान में अचानक आई तेजी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं इस समय अपने सबसे अहम चरण ‘दाना भरने’ की अवस्था में है. ऐसे में मौसम का यह बदलाव सीधे तौर पर उत्पादन और गुणवत्ता पर असर डाल सकता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस दौरान तापमान सामान्य से अधिक बना रहता है, तो फसल समय से पहले पकने लगती है, जिससे दानों का आकार छोटा रह जाता है और पैदावार में कमी आती है. सीधी के किसान गंगा कुशवाहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए ठंडा मौसम बेहद जरूरी होता है. मार्च में अचानक बढ़ी गर्मी फसल के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है. यदि तापमान इसी तरह ऊंचा बना रहा, तो दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाएंगे, जिससे उपज और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होंगी.
कृषि अधिकारी संजय सिंह ने भी बढ़ते तापमान को लेकर किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि जब दिन का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, तो गेहूं के पौधों में प्रकाश संश्लेषण और पोषक तत्वों के संचार की प्रक्रिया प्रभावित होती है. इससे दाने पतले, हल्के और सिकुड़े हुए रह जाते हैं और प्रति बीघा उत्पादन घट जाता है. इस स्थिति को ‘हीट स्ट्रेस’ कहा जाता है, जो फसल के लिए बेहद नुकसानदायक होता है. इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने दो प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट (13:00:45) के छिड़काव की सलाह दी है. इसके लिए 2.5 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट को 125 लीटर पानी में घोलकर प्रति बीघा के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए. इससे पौधों की गर्मी सहने की क्षमता बढ़ती है और दानों का भराव बेहतर होता है.
समय-समय पर करें हल्की सिंचाई
संजय सिंह के अनुसार, समय-समय पर हल्की सिंचाई करने से पौधों का तापमान नियंत्रित रहता है और वे लू के प्रभाव को झेलने में सक्षम होते हैं. हालांकि सिंचाई करते समय सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी है. खेत में जरूरत से ज्यादा पानी नहीं देना चाहिए ताकि जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे. उन्होंने किसानों को यह भी सलाह दी कि तेज हवा और साफ मौसम के दौरान सिंचाई से बचें क्योंकि इससे फसल के गिरने (लॉजिंग) का खतरा बढ़ जाता है. यदि फसल गिर जाती है, तो दानों तक पोषण पहुंचना रुक जाता है और कटाई में भी दिक्कत आती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.