इंदौर के बृजेश्वरी एनेक्स में हुए अग्निकांड ने इलेक्ट्रिक व्हीकल के रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। हादसा ईवी की चार्जिंग के दौरान हुआ या फिर इलेक्ट्रिक पोल की वजह से इसे लेकर विरोधाभास है। इन सब के बीच भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि शहर के 50 हजार इलेक्ट्रिक व्हीकल में से 99 फीसदी की बैटरी असुरक्षित तरीके से चार्ज की जा रही है। जबकि, विद्युत वितरण कंपनी ईवी चार्ज करने के लिए अलग से कनेक्शन देती है। इसका टैरिफ भी कमर्शियल विद्युत कनेक्शन से कम है। आखिर लोग असुरक्षित तरीके से कैसे ईवी की बैटरी चार्ज कर रहे हैं? बिजली कंपनी जब अलग से कनेक्शन देती है, तो फिर कनेक्शन क्यों नहीं लिया जा रहा? बैटरी चार्ज करने का तरीका क्या है? इन सभी सवालों का जवाब जानने भास्कर ने एक्सपर्ट और बिजली कंपनी के अफसरों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट ईवी चार्जिंग के लिए अलग कनेक्शन और टैरिफ
बिजली कंपनी के पास EV चार्जिंग के लिए एक समर्पित नीति मौजूद है। जिन घरों में इलेक्ट्रिक वाहन हैं, वे अलग से कनेक्शन ले सकते हैं। इसका टैरिफ भी घरेलू और कमर्शियल कनेक्शन से कम है। जहां घरेलू कनेक्शन पर 3.50 से 7 रुपये प्रति यूनिट (स्लैब के अनुसार) और कमर्शियल पर 8 रुपये प्रति यूनिट का चार्ज लगता है। वहीं EV चार्जिंग कनेक्शन के लिए यह दर मात्र 7.14 रुपये प्रति यूनिट है। इसका मतलब है कि अलग से कनेक्शन लेना न केवल सुरक्षित है, बल्कि कई मामलों में सस्ता भी पड़ सकता है। इस कनेक्शन के तहत अलग से वायरिंग, एक समर्पित मीटर और लोड ट्रांसफर की व्यवस्था होती है, जो घर के मुख्य इलेक्ट्रिकल सर्किट को ओवरलोड होने से बचाता है। ऐसे में आग लगने जैसे हादसों का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। इंदौर बिजली कंपनी के अधीक्षण यंत्री दिलीप कुमार गाठे कहते हैं, हम EV चार्ज करने के लिए अलग से कनेक्शन देते हैं, लेकिन लोग आगे नहीं आते। कंपनी ने यह व्यवस्था कर रखी है कि एक ही घर में दूसरा कनेक्शन दे सकते हैं। अगर लोग चार्जिंग के लिए अलग कनेक्शन लें तो यह उनके लिए ही फायदेमंद और सुरक्षित होगा। इसका टैरिफ भी कम है। सामान्य वायरिंग से ईवी चार्ज करना खतरनाक-एक्सपर्ट
बिजली कंपनी के रिटायर्ड इंजीनियर जीके वैष्णव बताते हैं, लगभग पांच साल पहले जब EV आने शुरू हुए, तो इंदौर ने ही सबसे पहले छह इलेक्ट्रिक वाहन खरीदकर एक सकारात्मक संदेश दिया था। उसी समय यह पॉलिसी बनी थी कि EV को चार्ज करने के लिए 7 से 9 किलोवॉट का पावर चाहिए होता है। घरों की सामान्य वायरिंग और कनेक्शन इतना अतिरिक्त लोड उठाने के लिए नहीं बने होते। इसलिए अलग कनेक्शन की व्यवस्था की गई। लेकिन लोगों में यह भ्रम फैल गया कि इसमें ज्यादा पैसा लगेगा, और वे घरेलू कनेक्शन से ही वाहन चार्ज करने लगे, जिससे आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ गया। लोगों को घरों में वाहन चार्ज करने से बचना चाहिए और चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग करना चाहिए। 10 हजार बचाने के चक्कर में जान से खिलवाड़
खतरे की एक और बड़ी वजह है सस्ते और गैर-प्रमाणित चार्जिंग उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल। चार पहिया वाहनों के साथ कंपनी जो ओरिजिनल चार्जर देती है, उसकी कीमत 35,000 रुपये से ज्यादा होती है। इसे कंपनी के विशेषज्ञ इंस्टॉल करते हैं और इसमें ऑटो-कटऑफ जैसे सेफ्टी फीचर्स होते हैं, जो ओवरलोडिंग होने पर चार्जर को बंद कर देते हैं। लेकिन जब यह चार्जर खराब हो जाता है, तो लोग 10-12 हजार रुपये बचाने के लिए बाजार से 25,000 रुपये वाला सस्ता चार्जर खरीद लेते हैं। यहीं से सुरक्षा के साथ सबसे बड़ा समझौता शुरू होता है। इससे भी बदतर स्थिति ई-रिक्शा और टू-व्हीलर सेगमेंट में है। इनके चार्जर बाजार में 3,000 से 8,000 रुपये में आसानी से मिल जाते हैं, जिनकी क्वालिटी और सुरक्षा मानकों का कोई भरोसा नहीं होता। 7 पॉइंट्स में समझिए चार्जिंग के समय बरती जाने वाली सावधानियां इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर और EV चार्जिंग व्यवस्था के विशेषज्ञ ईश्वर भारद्वाज कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। वायरिंग, अर्थिंग और प्रॉपर कनेक्शन जरूरी- एक्सपर्ट रिटायर्ड एई जीके वैष्णव हादसों की तकनीकी वजहों को और गहराई से समझाते हैं।
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