हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी कब है? उज्जैन के आचार्य से जानें व्रत का महत्व और पूजा का शुभ

हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी कब है? उज्जैन के आचार्य से जानें व्रत का महत्व और पूजा का शुभ


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हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी कब है? उज्जैन के आचार्य से जानें व्रत का महत्व

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Kamda Ekadashi 2026: हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस पावन दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय और श्रद्धा से की गई आराधना से पूरे वर्ष लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

Kamda Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में वर्षभर में 24 एकादशी व्रत होते हैं, जो हर माह दो बार पड़ते हैं. प्रत्येक एकादशी का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन सभी में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है. चैत्र माह को अत्यंत पवित्र माना गया है और इसकी शुरुआत भी हो चुकी है. ऐसे में इस माह की अंतिम और हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे कामदा एकादशी कहा जाता है. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही अगर इस दिन श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की पूजा की जाएं, तो पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है. यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना गया है.

कब मनाई जाएगी हिन्दू नववर्ष की पहली एकादशी?
हिंदू पंचांग की गणना अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 मार्च को सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 29 मार्च को सुबह 7 बजकर 46 मिनट पर होगा ऐसे में 29 मार्च को कामदा एकादशी मनाई जाएगी.

कामदा एकादशी व्रत का महत्व
कामदा एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं. विशेष रूप से पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और रिश्तों में मधुरता आती है. कहा जाता है कि इस पावन दिन व्रत रखने और श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति के पाप कर्मों का क्षय होता है.साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और समृद्धि के मार्ग खुलते हैं.

एकादशी व्रत में जरूर करें ये कार्य
एकादशी के पावन दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना अत्यंत शुभ माना जाता है. इसके बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें पीले रंग की मिठाई का भोग अर्पित करें, क्योंकि पीला रंग उन्हें विशेष प्रिय है. पूजा में मां लक्ष्मी का भी स्मरण और पूजन करना चाहिए, जिससे धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. मान्यता है कि इस दिन पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है.

जरूर करें इन मंत्रों का जाप 
1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।

2. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

3. ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||
ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



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