हर बूंद की सही माप से बचेगी मां की जान: मातृ मृत्यु के 33% मामलों में PPH खास कारण; नेशनल कॉन्फ्रेंस में एक्सपर्टस का अलर्ट – Indore News

हर बूंद की सही माप से बचेगी मां की जान:  मातृ मृत्यु के 33% मामलों में PPH खास कारण; नेशनल कॉन्फ्रेंस में एक्सपर्टस का अलर्ट – Indore News




इंदौर में आयोजित दो दिनी नेशनल कॉन्फ्रेंस में प्रसवोत्तर रक्तस्राव (पोस्ट पार्टम हेमरेज, PPH) को मातृ मृत्यु का बड़ा कारण बताया गया। एक्सपर्टस के मुताबिक कुल मातृ मृत्यु के लगभग 33% मामलों में PPH की भूमिका होती है। कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए स्त्री रोग एक्सपर्ट्स ने इस बात पर जोर दिया कि प्रसव के बाद होने वाले ब्लीडिंग की समय पर पहचान, वैज्ञानिक आकलन और तुरंत उपचार से अनेक माताओं की जान बचाई जा सकती है। बता दें, मातृ मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से आब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसायटी द्वारा ने यह कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। ब्लीडिंग को “कम-ज्यादा” नहीं, एमएल में मापें एसोसिएशन की जनरल सेक्रेटरी डॉ. सुवर्णा खाड़िलकर ने कहा कि प्रसवोत्तर रक्तस्राव का आकलन अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि मिलीलीटर (एमएल) में किया जाना चाहिए। इससे स्थिति की गंभीरता स्पष्ट होगी और उपचार में देरी नहीं होगी। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने और ट्रेनिंग पर विशेष बल दिया। इन स्थितियों में बढ़ जाता है खतरा एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. सुमित्रा यादव ने बताया कि- इन परिस्थितियों में PPH का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे मामलों की पूर्व पहचान कर विशेष निगरानी आवश्यक है। देश में मातृ मृत्यु दर की स्थिति संसाधन और स्टाफ की कमी भी चुनौती एक्सपर्ट्स ने कहा कि कई बार मातृ मृत्यु का कारण समय पर पहचान नहीं होना, उपचार में देरी और संसाधनों की कमी भी होती है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक आवश्यक उपकरण, दवाएं और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। कॉन्फ्रेंस में सचिव डॉ. सुनीता चौहान, कोषाध्यक्ष डॉ. प्रीति माहेश्वरी सहित अनेक एक्सपर्ट्स ने अनुभव साझा किए। इसके साथ ही मातृ मृत्यु दर में कमी लाने का संकल्प लिया।



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