सिंहस्थ 2028 से पहले संतों में ‘पावर गेम’! एक कुर्सी पर दो दावेदार, उज्जैन में बढ़ी हलचल

सिंहस्थ 2028 से पहले संतों में ‘पावर गेम’! एक कुर्सी पर दो दावेदार, उज्जैन में बढ़ी हलचल


Kumbh Mela News: उज्जैन, जिसे Mahakaleshwar Temple की नगरी कहा जाता है, इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में है. आने वाले सिंहस्थ 2028 (महाकुंभ) से पहले संत समाज में हलचल तेज हो गई है.

रविवार को मंगलनाथ रोड स्थित खाक चौक पर श्री पंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़े में देशभर के संत-महंतों की बड़ी बैठक हुई, जहां माहौल काफी गंभीर नजर आया.

बड़ा फैसला, बढ़ी हलचल
इस बैठक में आठ प्रमुख अखाड़ों के संतों ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Ravindra Puri को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष घोषित कर दिया. जैसे ही यह घोषणा हुई, संत समाज में हलचल और तेज हो गई. ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत भी किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि यह फैसला सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन भी है.

एक कुर्सी पर दो दावेदार
सबसे दिलचस्प बात ये है कि अब 13 अखाड़ों में दो अलग-अलग गुट बन गए हैं. एक पक्ष निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मान रहा है. दूसरा पक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पुरी को ही असली अध्यक्ष बता रहा है. यानी एक ही नाम, लेकिन दो अलग-अलग दावे जिससे मामला और उलझ गया है.

सिंहस्थ से पहले बढ़ी सियासी हलचल
प्रयागराज कुंभ के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब उज्जैन तक पहुंच चुका है. पिछले 6 महीनों से रविंद्र पुरी लगातार उज्जैन आ रहे हैं और प्रशासन भी उन्हें सिंहस्थ की तैयारियों से जुड़ी जानकारी दे रहा है. इससे साफ है कि यह मामला सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि अंदरूनी ताकत और नेतृत्व का भी है.

क्या बोले रविंद्र पुरी
बैठक के बाद रविंद्र पुरी ने शांत अंदाज में कहा कि हरिद्वार में हुए फैसले के अनुसार बहुमत से उन्हें अध्यक्ष चुना गया था और वे उसी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मतभेद पहले भी होते रहे हैं और समय के साथ सुलझ जाते हैं.

क्या मतलब है इस पूरे घटनाक्रम का
सिंहस्थ 2028 जैसे बड़े आयोजन से पहले संत समाज में यह खींचतान आने वाले समय में और बढ़ सकती है. उज्जैन की पवित्र धरती पर जहां एक ओर आस्था है, वहीं अब नेतृत्व और वर्चस्व की कहानी भी खुलकर सामने आ रही है.



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