स्वास्थ्य विभाग ने टीकमगढ़ जिले के जतारा सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। मंगलवार को CMHO डॉ. ओपी अनुरागी ने इस विवाद पर विभाग का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्लांट तकनीकी खराबी नह
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चार महीने पहले चोरी हुई थी सप्लाई पाइपलाइन
डॉ. अनुरागी ने बताया कि लगभग चार महीने पहले ऑक्सीजन प्लांट की मुख्य सप्लाई पाइपलाइन चोरी हो गई थी। इस चोरी के कारण वार्डों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप है।
सीएमएचओ ने बताया कि इस संबंध में जतारा थाने में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई जा चुकी है। वर्तमान में अस्पताल में ऑक्सीजन की वैकल्पिक व्यवस्था सिलेंडरों के माध्यम से की जा रही है।
एक सप्ताह पहले हुई मरीज की मौत
एक सप्ताह पहले 60 वर्षीय मरीज लंपू कुशवाहा की मौत के मामले में विभाग ने ऑक्सीजन की कमी के आरोपों को खारिज कर दिया है। मृतक के बेटे काशीराम कुशवाहा ने आरोप लगाया था कि ऑक्सीजन न मिलने से उनके पिता की जान गई।
हालांकि, डॉ. अनुरागी ने मामले में बताया कि अस्पताल में पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध थे और मरीज की माैत अन्य गंभीर बीमारियों के चलते हुई है।
लाखों की लागत से बना प्लांट बंद पड़ा
कोविड-19 महामारी के दौरान जतारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाखों रुपए की लागत से इस ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की गई थी। विधायक हरिशंकर खटीक ने इसका लोकार्पण किया था। उद्घाटन के कुछ महीनों बाद ही स्टाफ की कमी और रखरखाव के अभाव में यह प्लांट निष्क्रिय हो गया, जिससे सरकारी धन के सदुपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन करेगा जांच
भोपाल मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद अब स्थानीय प्रशासन यह जांच करेगा कि पाइपलाइन चोरी होने के बाद उसे बहाल करने में देरी क्यों हुई। साथ ही, स्टाफ की कमी के दावों और बंद पड़े प्लांट की जवाबदेही भी तय की जाएगी।