बालाघाट में भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नए आदेश के बाद होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंता बढ़ गई है। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के बंटवारे के लिए एक नया कोटा (प्राथमिकता क्रम) तय किया है, जिससे कारोबारी खुश नहीं हैं। नए आदेश के मुताबिक, रेस्टोरेंट को उनकी कुल जरूरत का केवल 9 प्रतिशत कमर्शियल सिलेंडर ही दिया जाएगा। होटल संचालकों का कहना है कि इतने कम गैस में काम चलाना नामुमकिन है। व्यापारी अविनाश जायसवाल ने सवाल उठाया कि जहां महीने में 30 सिलेंडरों की जरूरत होती है, वहां सिर्फ 3 सिलेंडरों से गुजारा कैसे होगा। व्यापारियों की मांग है कि कम से कम 50 प्रतिशत सप्लाई सुनिश्चित की जाए, तभी धंधा पटरी पर रह पाएगा। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का डर गैस की किल्लत की वजह से कई होटल संचालकों ने अब कोयले और डीजल वाली भट्टियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। संचालकों का कहना है कि इन दूसरे ईंधनों के इस्तेमाल से लागत बढ़ रही है। उनका अनुमान है कि अगर यही हाल रहा, तो जो खाने की चीज आज 100 रुपए की मिल रही है, उसकी कीमत 125 से 150 रुपए तक पहुंच सकती है। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। किसे कितना मिलेगा कोटा? सरकार ने अलग-अलग संस्थानों के लिए गैस आवंटन का प्रतिशत तय कर दिया है। शैक्षणिक और मेडिकल संस्थान: 30 प्रतिशत आवंटन। पुलिस, जेल, रेलवे और सरकारी विभाग: 35 प्रतिशत आवंटन। महिला बाल विकास और दीनदयाल रसोई: 35 प्रतिशत आवंटन। रेस्टोरेंट और अन्य: मात्र 9 प्रतिशत आवंटन। व्यापारियों की चेतावनी व्यापारियों का मानना है कि सरकार की यह नई व्यवस्था न तो व्यापार के हक में है और न ही जनता के। अगर गैस की सप्लाई में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में बाहर खाना-पीना काफी महंगा हो सकता है।
Source link