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- Shivraj Singh Chouhan Will Hold A Meeting In Madhya Pradesh Ashoknagar; Here’s Latest News Updates
भोपाल13 मिनट पहले
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चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान आज अशोकनगर और मुंगावली में सभाओं को संबोधित करेंगे।
- अब तक मध्य प्रदेश के 10 मुख्यमंत्रियों को यहां आने के बाद कुर्सी गंवानी पड़ी है
- इसलिए शनिवार को सीएम शिवराज अशोकनगर पहुंच तो रहे हैं, लेकिन दूरी बनाकर
यहां जो भी मुख्यमंत्री आया, उसकी कुर्सी चली गई। प्रदेश के 11 मुख्य मंत्रियों के साथ ऐसा हो भी चुका है। पिछले 17 साल में कोई भी मुख्यमंत्री अशोकनगर नहीं गया। चौथी बार सीएम बने शिवराज सिंह चौहान शनिवार को चुनाव प्रचार के लिए अशोकनगर और मुंगावली तहसीलों में पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके लिए सभा स्थल शहर (अशोकनगर) से 9 किलोमीटर की दूरी पर बनाया गया है। इसके पहले के कार्यकाल में सीएम शिवराज यहां पर एक बार भी नहीं आए हैं।
यहां आने के उनके कुछ प्रोग्राम बने भी, लेकिन वे ऐन वक्त पर रद्द कर दिए गए या फिर उनके लिए स्थान परिवर्तन कर दिया गया। चूंकि चुनाव प्रचार के लिए अशोकनगर जाना बेहद जरूरी था, इसीलिए शिवराज सिंह ने बीच का रास्ता निकाला और एक बार फिर खुद अशोकनगर जाएंगे। अशोकनगर से जजपाल सिंह जज्जी और मुंगावली से मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव भाजपा के प्रत्याशी हैं। इन दोनों सीटों पर उपचुनाव हो रहा है, क्योंकि दोनों नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा के साथ आ गए थे।
मुख्यमंत्री पद गंवाने वाले 10 मुख्यमंत्री ये हैं
कुर्सी गंवाने वाले मुख्यमंत्रियों में 1963 में भगवंत राव मंडलोई, 1967 में द्वारका प्रसाद मिश्रा, 1969 में गोविंद नारायण सिंह, 1975 में प्रकाश चंद्र सेठी, 1977 में श्यामा चरण शुक्ल, 1980 में वीरेंद्र कुमार सकलेचा, 1985 में अर्जुन सिंह, 1988 में मोतीलाल वोरा और 1992 में सुंदरलाल पटवा और 2003 में दिग्विजय सिंह को अपनी सीएम की कुर्सी से हटना पड़ा था।
मुख्यमंत्री की कुर्सियां खाने वाले अशोकनगर का यह मिथक कितना सही है या कितना गलत है तो कहना मुश्किल है लेकिन सत्ता में रहते हुए जो लोग भी अशोकनगर गए उनकी कुर्सी उसी दिन में चली गई ऐसे ही कुछ बड़े नाम हैं…
1975 में प्रकाश चंद्र सेठी : तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी इसी साल पार्टी के अधिवेशन में अशोक नगर गए और साल खत्म होते-होते बाय दिसंबर 1975 को उनकी कुर्सी चली गई।
1977 में श्यामा चरण शुक्ला: तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ला तुलसी सरोवर का लोकार्पण करने अशोकनगर की 29 मार्च 1977 राष्ट्रपति शासन लगा और उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा।
1985 में अर्जुन सिंह : 1985 में कांग्रेस के कद्दावर नेता अर्जुन सिंह भी इस मिथक के जाल में फंस गए उनके मुख्यमंत्री रहते हैं तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी दौरे पर आए। अर्जुन सिंह को इनके साथ अशोकनगर जाना पड़ा, फिर सियासी हालात ऐसे बने इन्हें अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी।
1988 में मोतीलाल वोरा : 1988 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा अशोक नगर के रेलवे स्टेशन के फुट ओवर ब्रिज का उद्घाटन के लिए रेलमंत्री माधवराव सिंधिया के साथ पहुंचे थे अशोकनगर। इसके बाद इन्हें सीएम की कुर्सी से हटना पड़ा।
1992 में सुंदरलाल पटवा : अशोक नगर में आयोजित कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने की कुर्सी चली गई। असल में इसी साल अयोध्या के विवादित ढांचे को ढाया गया था जिसके कारण भाजपा शासित राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था और सुंदरलाल पटवा को इसीलिए कुर्सी छोड़नी पड़ी।
2003 में दिग्विजय सिंह: अशोकनगर में कमाने वालों की फेहरिस्त में देगी राजा का नाम भी शामिल है यहां पर चुनाव नहीं बल्कि 2001 में माधवराव सिंधिया के देहांत के बाद खाली हुई सीट पर उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रचार के लिए अशोकनगर गए थे। फिर भी उनकी कुर्सी नहीं बची। हालांकि उनकी कुर्सी जाने में थोड़ा वक्त लगा लेकिन 2003 में उमा भारती ने ने कुर्सी से बेदखल कर दिया।