तिल की बढ़ती डिमांड! गर्मियों में करें खेती, सही तकनीक से छप्परफाड़ कमाई

तिल की बढ़ती डिमांड! गर्मियों में करें खेती, सही तकनीक से छप्परफाड़ कमाई


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तिल की बढ़ती डिमांड! गर्मियों में करें खेती, सही तकनीक से छप्परफाड़ कमाई

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Sesame Farming Tips: तिल की फसल करीब 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. जब फलियां सुनहरी-पीली होने लगें, तब फौरन कटाई कर लेनी चाहिए. देरी करने पर फलियां चटकने लगती हैं. इससे बीज झड़ने का खतरा बढ़ जाता है.

सतना. भीषण गर्मी के बीच जहां ज्यादातर किसान फसलों को लेकर चिंतित रहते हैं, वहीं तिल की खेती एक ऐसा विकल्प बनकर उभर रही है, जो कम लागत में बेहतर मुनाफा दे सकती है. खासकर सतना और आसपास के क्षेत्रों में मंदिरों में तिल की लगातार मांग किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन रही है. यदि सही समय पर उन्नत किस्मों का चयन और वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए, तो गर्मियों में भी तिल की फसल से लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं. लोकल 18 से बातचीत में रामपुर के किसान अंशुमान सिंह ने बताया कि मार्च के अंत से लेकर अप्रैल की शुरुआत तक तिल की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय होता है. इस दौरान आरटी-351, टीकेजी-22 और आरटी-125 जैसी उन्नत किस्में किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती हैं. ये किस्में न केवल तेजी से बढ़ती हैं बल्कि तेज गर्मी और लू को भी सहन करने की क्षमता रखती हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित नहीं होता.

गर्मी के मौसम में मिट्टी की नमी तेजी से खत्म हो जाती है, इसलिए बुवाई से पहले खेत में पलेवा यानी हल्की सिंचाई करना बेहद जरूरी है. इससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और पौधों की शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है. प्रति एकड़ डेढ़ से दो किलो बीज पर्याप्त होता है लेकिन बीजों को कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा से उपचारित करना न भूलें ताकि जड़ गलन जैसी बीमारियों से बचाव किया जा सके.

वैज्ञानिक तरीके से बुवाई और पोषण प्रबंधन
तिल की बुवाई कतारों में करनी चाहिए और पौधों के बीच 25 से 30 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखना जरूरी है. इससे पौधों को पर्याप्त जगह और पोषण मिलता है. खाद के रूप में प्रति एकड़ 15 किलो नाइट्रोजन और 10 किलो सल्फर का उपयोग करना चाहिए. खासतौर पर सल्फर का प्रयोग दानों में तेल की मात्रा बढ़ाने में सहायक होता है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलती है.

सिंचाई और कीट नियंत्रण का विशेष ध्यान
अप्रैल और मई की तेज गर्मी में फसल को बचाने के लिए हर 6 से 8 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करना जरूरी है. विशेषकर फूल आने और फलियां बनने के समय नमी की कमी नहीं होनी चाहिए. साथ ही फिलोडी रोग से बचाव के लिए रस चूसक कीटों का समय पर नियंत्रण करना बेहद आवश्यक है, वरना फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

समय पर कटाई से बचाएं नुकसान
तिल की फसल लगभग 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. जब फलियां सुनहरी-पीली होने लगें, तब तुरंत कटाई कर लेनी चाहिए. देरी करने पर फलियां चटकने लगती हैं और बीज झड़ने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उत्पादन में नुकसान हो सकता है.

कम लागत में ज्यादा मुनाफा
यदि किसान इन सभी वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तो गर्मियों के इस मौसम में भी प्रति एकड़ 4 से 6 क्विंटल तक पैदावार आसानी से हासिल की जा सकती है. सतना क्षेत्र में मंदिरों में तिल की अच्छी मांग होने के कारण किसानों को बेहतर दाम भी मिलते हैं. ऐसे में तिल की खेती न सिर्फ जोखिम कम करती है बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प भी बन रही है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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