इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क (IMA JDN) मध्यप्रदेश ने एमडी/एमएस (2023–2026 बैच) के पीजी स्टूडेंट्स के लिए थीसिस जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग उठाई है। संगठन ने मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर प्रशासन को औपचारिक पत्र भेजकर 30 अप्रैल 2026 तक समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि क्लिनिकल ड्यूटी, जिला रेजिडेंसी और परीक्षाओं के दबाव के चलते वे निर्धारित समय में शोध कार्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त समय जरूरी है। क्लिनिकल दबाव बना सबसे बड़ा कारण
IMA JDN के अनुसार वर्तमान में पीजी छात्र अस्पतालों में लगातार क्लिनिकल जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके साथ ही जिला रेजिडेंसी प्रोग्राम और नियमित परीक्षाओं का दबाव भी बना हुआ है। ऐसे में शोध के लिए आवश्यक समय नहीं मिल पा रहा है, जिससे थीसिस अधूरी रहने का खतरा बढ़ गया है। डेटा संग्रहण में आ रही दिक्कतें
संगठन ने यह भी बताया कि शोध कार्य के लिए जरूरी डेटा संग्रहण में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। कई मामलों में मरीजों के आंकड़े जुटाने और उनका विश्लेषण करने में देरी हो रही है, जिससे निर्धारित समय-सीमा में थीसिस तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। IMA JDN के महासचिव डॉ. कुलदीप गुप्ता ने कहा कि थीसिस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि जल्दबाजी में इसे पूरा किया गया तो इसकी गुणवत्ता और वैज्ञानिक मानकों पर असर पड़ेगा। इसलिए छात्रों को पर्याप्त समय दिया जाना जरूरी है, ताकि वे बेहतर और शोधपरक कार्य प्रस्तुत कर सकें। 30 अप्रैल तक समय बढ़ाने की मांग
संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया है कि थीसिस जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 अप्रैल 2026 किया जाए। इससे छात्रों को अपने शोध कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने का अवसर मिलेगा।
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