शुक्रवार शाम रामनवमी पर शोभायात्रा निकाली गई। मण्डलेश्वर में मुस्लिम समाज ने रामलला की पालकी का स्वागत किया, तो वहीं महेश्वर में राम-हनुमान का मिलन हुआ। मण्डलेश्वर के पुराने श्रीराम मंदिर में जन्मोत्सव की पूर्णता हुई। भगवान को पंचामृत से स्नान कराया गया, नई पोशाक से प्रभु का सुंदर श्रृंगार हुआ। शाम को नर्मदा किनारे से भगवान की सुंदर पालकी यात्रा शुरू हुई, जहां मण्डलेश्वर की एकता की अनोखी तस्वीर दिखी। बस स्टैंड पर मुस्लिम समाज के सदर साहिल कुरैशी, पूर्व नपा अध्यक्ष हाजी अब्दुल खालिक कुरैशी और अन्य लोगों ने पालकी पर फूल बरसाकर जोरदार स्वागत किया। तीर्थयात्रा रास्ते में शामिल होने की उम्मीद दिल्ली से आए खोजकर्ता आचार्य दिलीप करपे ने मण्डलेश्वर और महेश्वर को श्रीराम की तीर्थयात्राओं के रास्ते में शामिल किए जाने की पूरी संभावना जताई। यात्रा के दौरान नपा अध्यक्ष विश्वदीप मोयदे सहित पार्षदों और नागरिकों ने भी फूल बरसाए। सुरक्षा के लिए थाना प्रभारी पंकज तिवारी के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा। महेश्वर में राम-हनुमान का मिलन दूसरी ओर, महेश्वर में पूरे हिंदू समाज और संस्था राम संकल्प की ओर से प्रभु रामलला की शोभायात्रा निकाली गई। भगवान श्रीराम बग्घी और पालकी में सवार होकर शहर घूमने निकले। यह यात्रा भवानी माता चौक से शुरू हुई। जब शोभायात्रा रणजीत हनुमान मंदिर पहुंची, तो वहां पुराने समय की यादें ताजा हो गईं। यहां केवट समाज ने भगवान श्रीराम के पैर धोने की पुरानी परंपरा निभाई और इसके बाद प्रभु राम और हनुमान जी का भावपूर्ण मिलन हुआ। महाप्रसाद के साथ समापन इस मिलन के बाद मांझी कहार समाज के लोगों ने प्रभु को पालकी में बैठाकर विजय स्वामी राम मंदिर पहुंचाया। इस दौरान महिलाओं की भजन मंडलियां गीत गाती रहीं। अंत में संगीत के साथ आरती और महाप्रसाद के साथ उत्सव का समापन हुआ।
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