सहकारिता विभाग द्वारा ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 28 मार्च तय किए जाने के विरोध में किसानों का आक्रोश बढ़ रहा है। भारतीय किसान यूनियन और अन्य किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि यह तारीख 30 अप्रैल तक नहीं बढ़ाई गई, तो 4 अप्रैल से धार, बदनावर और राजगढ़ की अनाज मंडियों के गेट बंद कर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जाएगा। कर्ज की डेडलाइन को लेकर किसानों में नाराजगी
किसानों का कहना है कि वर्तमान में वे फसल कटाई और बिक्री के कार्यों में व्यस्त हैं। कई किसानों की फसल अभी खेतों में खड़ी है, जबकि कई बिक्री की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में 28 मार्च तक कर्ज जमा करना संभव नहीं है। समय-सीमा के कारण किसान न तो फसल बेच पा रहे हैं और न ही कर्ज चुका पा रहे हैं, जिससे उन्हें डिफॉल्टर घोषित किए जाने का खतरा है। भारतीय किसान यूनियन से जुड़े नेताओं ने बताया कि इस मांग को लेकर पहले भी कई बार ज्ञापन सौंपे गए और आंदोलन किए गए, लेकिन शासन-प्रशासन ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष राकेश सोलंकी ने कहा कि किसानों ने पहले ही 28 मार्च से 30 अप्रैल तक तारीख बढ़ाने की मांग रखी थी, जिस पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब किसानों के पास सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपील की है कि वे ऋण माफी नहीं, बल्कि केवल तारीख बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार एक महीने का समय भी नहीं बढ़ा पा रही है। किसानों ने चेतावनी दी है कि 4 अप्रैल को सुबह 11 बजे से धार, बदनावर और राजगढ़ मंडी गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। यदि 30 अप्रैल तक तारीख नहीं बढ़ाई गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। किसानों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे धरना स्थल पर खुले में बैठेंगे और यदि इस दौरान किसी प्रकार की जनहानि होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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