माहिष्मति पंचकोशी यात्रा: 40 डिग्री तापमान में पैदल चलेंगे 10 हजार श्रद्धालु

माहिष्मति पंचकोशी यात्रा: 40 डिग्री तापमान में पैदल चलेंगे 10 हजार श्रद्धालु


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Mahishmati Panchkroshi Yatra: इस बार यात्रा 29 मार्च से शुरू होगी, जिसमें करीब 10 हजार श्रद्धालु शामिल होंगे. श्रद्धालु 5 दिन में लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करेंगे. खास बात ये कि इस बार पहली बार यात्री मंडलेश्वर से कसरावद के बीच नर्मदा पुल पार करेंगे.

Khargone News: मध्य प्रदेश के खरगोन की धार्मिक नगरी महेश्वर से निकलने वाली मां नर्मदा की लघु पंचकोशी पदयात्रा इस वर्ष अपने 40वें वर्ष में प्रवेश कर रही है. इस बार यात्रा 29 मार्च से शुरू होगी, जिसमें करीब 10 हजार श्रद्धालु शामिल होंगे. श्रद्धालु 5 दिन में लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करेंगे. खास बात ये कि इस बार पहली बार यात्री मंडलेश्वर से कसरावद के बीच नर्मदा पुल पार करेंगे. यात्रा के दौरान मौसम भी श्रद्धालुओं की परीक्षा लेगा. इस बार तापमान 40 से 42 डिग्री तक रहने की संभावना है. इसके बावजूद बच्चे, बुजुर्ग, युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में पदयात्रा में शामिल होंगे. यात्रा का समापन 2 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव के दिन महेश्वर में होगा.

इस वर्ष हुई थी शुरुआत
बता दें, मां नर्मदा के तट पर पंचकोशी यात्राओं की परंपरा काफी पुरानी रही है. पंचकोशी यात्राओं की शुरुआत गुरुदेव डॉ. रविंद्र भारती चौरे ने की थी. उन्होंने सबसे पहले वर्ष 1975 में ओंकारेश्वर से पंचकोशी यात्रा शुरू कराई थी. इसके बाद वर्ष 1985 में महेश्वर से दूसरी पंचकोशी यात्रा की शुरुआत हुई. महेश्वर से निकली पहली पंचकोशी यात्रा में केवल 10 श्रद्धालु शामिल हुए थे. लेकिन, समय के साथ इस यात्रा का स्वरूप बड़ा होता गया. आज इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. वर्तमान में यह यात्रा क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में शामिल हो चुकी है.

संतों की प्रेरणा से शुरू हुई पंचकोशी यात्रा
आयोजन समिति के अनुसार, महेश्वर में पूज्य संत डोंगरे महाराज की कथा के दौरान पंचकोशी यात्रा शुरू करने का विचार सामने आया था. इसके बाद डॉ. रविंद्र भारती चौरे ने अपने गुरु श्रीकृष्ण स्वरूप महाराज और डोंगरे महाराज को समर्पित करते हुए इस यात्रा की शुरुआत की. पंचकोशी यात्राओं के जनक माने जाने वाले डॉ. चौरे का पुनासा में पंचकोशी यात्रा के दौरान ही निधन हो गया था. पहली यात्रा के ध्वज वाहक स्वर्गीय शिव शंकर वकील साहब थे. बाद में यात्रा के संचालन के लिए समिति का गठन वर्ष 1990 में किया गया.

चैत्र एकादशी से शुरू होगी यात्रा
हर वर्ष की तरह इस बार भी यात्रा चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होगी और हनुमान जन्मोत्सव तक चलेगी. यात्रा की शुरुआत 29 मार्च को सुबह 6 बजे अहिल्या घाट पर नर्मदा पूजन, ध्वज पूजन और आरती के साथ होगी. इसके बाद श्रद्धालु राजराजेश्वर मंदिर के दर्शन कर पदयात्रा शुरू करेंगे. यात्रा महेश्वर के प्रमुख मार्गों से होकर रामकुंड, बाराद्वारी और ढपला होते हुए पहले दिन चोली गांव पहुंचेगी. यहां श्रद्धालु रात्रि विश्राम करेंगे. यात्रा के दौरान 20 से अधिक गांवों से होकर श्रद्धालु गुजरेंगे.

पहली बार मंडलेश्वर से पुल पार करेंगे श्रद्धालु
दूसरे दिन यात्रा चोली से जलूद इंटकवेल पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम होगा. तीसरे दिन यात्रा मंडलेश्वर से कसरावद के बीच पहली बार नर्मदा पुल पार करेगी. इसके बाद वेदा-रेवा संगम, स्वर्णदीप तीर्थ, वेदवेदेश्वर तीर्थ और माकड़खेड़ा होते हुए कसरावद पहुंचेगी. चौथे दिन यात्रा भीलगांव, सत्यधाम आश्रम और डोंगरगांव होते हुए ढालखेड़ा आश्रम पहुंचेगी. यहां से श्रद्धालु नाव के माध्यम से नर्मदा पार कर सहस्त्रधारा क्षेत्र के जलकोटी गांव पहुंचेंगे. यहां रात्रि विश्राम होगा.

दो बार नर्मदा पार कर पूरी होगी 70 किमी की परिक्रमा
यात्रा के अंतिम दिन श्रद्धालु जलकोटी स्थित श्रीदत्त मंदिर के दर्शन करेंगे. इसके बाद यात्रा महेश्वर लौटेगी, जहां विभिन्न देवालयों में दर्शन के बाद नर्मदा पूजन और आरती होगी. इसके बाद भोजन प्रसादी के साथ यात्रा का समापन किया जाएगा.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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