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Akhada Parishad: उज्जैन में होने सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले अखाड़ा परिषद की सियासत अब और तेज होती नजर आ रही है, जिसका असर आने वाले समय में और साफ दिख सकता है. इस समय अखाड़ा परिषद में दो अध्यक्ष हैं. इसी बीच निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ने कड़ा रुख अपनाया है.
अखाड़ा परिषद में अध्यक्ष पद को लेकर जुबानी जंग
Akhada Parishad President Controversy: उज्जैन में अखाड़ा राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. बीते रविवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद खुलकर सामने आया. दरअसल इस समय अखाड़ा परिषद में दो अध्यक्ष सामने हैं. एक हैं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी महाराज, जिनके पास 8 अखाड़ों का समर्थन बताया जा रहा है. वहीं दूसरे हैं निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज, जिनके पास 5 अखाड़ों का समर्थन बताया जा रहा है. अब दो अध्यक्ष होने की वजह से असमंजस की स्थिति बनी हुई है. अब निरंजनी अखाड़े के रवींद्र पुरी महाराज का बयान सामने आया है और उन्होंने जुबानी हमला तेज कर दिया है.
निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ने विरोधियों पर साधा निशाना
निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ने साफ कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव नासिक कुंभ के बाद ही होंगे. उन्होंने इशारों-इशारों में विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब किसी को पद नहीं मिलता, तो उसकी मानसिकता कमजोर हो जाती है. साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग कुंभ जैसे बड़े आयोजन को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा.
दो अध्यक्ष होने पर दिया ऐसा जवाब
रविंद्र पुरी महाराज से जब दो-दो अध्यक्षों के दावे को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ से उनकी पहचान पूरे देश में है. जबकि कुछ लोग नासिक में भंडारे के नाम पर खुद को अध्यक्ष घोषित कर बैठे. चुनाव हो चुका है. उन्होंने कहा कि आने वाला कुंभ दिव्य और भव्य हो, जो भी इसमें बाधा डालने की कोशिश करें. उसका अंत हो.
उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ से पहले अतिक्रमण हटाने को लेकर उन्होंने कहा कि इस बारे में उनकी मुख्यमंत्री से बात होने वाली है. यह मार्ग प्राचीन समय से चला आ रहा है और यहां बनी मजारों को लेकर सरकार से चर्चा की जाएगी. अतिक्रमण हटाना जरूरी है
उज्जैन कुंभ के बाद हो सकता है नए अध्यक्ष का चयन
इस पूरे विवाद के बीच उन्होंने एक और बड़ा बयान देते हुए कहा कि नासिक कुंभ के बाद ही अखाड़ा परिषद के चुनाव कराए जाएंगे. यानी संकेत साफ हैं कि उज्जैन में 2028 कुंभ से पहले ही नए अध्यक्ष का चयन हो सकता है.