ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भाजपा का पावर बैलेंस! जयभान सिंह पवैया की एंट्री मास्टरस्ट्रोक

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भाजपा का पावर बैलेंस! जयभान सिंह पवैया की एंट्री मास्टरस्ट्रोक


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मध्य प्रदेश में पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इससे उनके समर्थकों में तो खुशी की लहर दौड़ी, लेकिन भाजपा का इसे मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है, क्योंकि ग्वालियर-चंबल संभाग हमेशा से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ रहा है और पवैया उनके विरोधी रहे हैं, लेकिन फिलहाल दोनों एक ही पार्टी में मौजूद हैं. पवैया को पद देकर पार्टी दोनों को साध रही है.

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जयभान सिंह पवैया बने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष

मध्य प्रदेश की राजनीति में ग्वालियर-चंबल संभाग हमेशा से ‘किंगमेकर’ रहा है. 34 विधानसभा सीटों वाला यह अंचल न सिर्फ लोकसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाता है, बल्कि प्रदेश की सत्ता समीकरण भी तय करता है. मार्च 2026 में भाजपा की आंतरिक शक्ति संतुलन में एक नया अध्याय जुड़ गया है. वरिष्ठ नेता और कट्टर हिंदुत्ववादी चेहरा जयभान सिंह पवैया को मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने ग्वालियर-चंबल, शिवपुरी-गुना क्षेत्र में एक तीसरा पावर सेंटर खड़ा कर दिया. यह नियुक्ति महज प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरी रणनीतिक है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बढ़ते दबदबे और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के स्थानीय प्रभाव के बीच पवैया की एंट्री पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं को संतोष देती है और सिंधिया शिविर को संतुलित रखेगी.

सिंधिया के पारंपरिक विरोधी रहे हैं पवैया
जयभान सिंह पवैया का राजनीतिक सफर खुद में एक बड़ा महत्‍वपूर्ण किस्सा है. वे सिंधिया परिवार के पारंपरिक विरोधी रहे हैं. 2014 में गुना लोकसभा सीट पर उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ चुनाव लड़ा था. बाद में ग्वालियर विधानसभा से जीतकर उच्च शिक्षा मंत्री भी बने. 2020 में सिंधिया के कांग्रेस से भाजपा आने के बाद क्षेत्र में सत्ता का समीकरण बदला. सिंधिया ने अपने साथ 22 विधायकों को लाकर भाजपा को बहुमत दिलाया, लेकिन इससे पुराने भाजपा नेताओं में असंतोष भी बढ़ा. नरेंद्र सिंह तोमर (मुरैना-चंबल का चेहरा) और सिंधिया के बीच सूक्ष्म खींचतान चलती रही. पवैया, जो पिछले कुछ वर्षों से किनारे पर थे, अब वित्त आयोग अध्यक्ष बनकर विकास निधि, पंचायत-नगरीय निकायों की फंडिंग और क्षेत्रीय असंतुलन सुधार जैसे मुद्दों पर सीधा प्रभाव डाल सकेंगे. यह पद उन्हें ‘किंगमेकर’ से ‘किंग बैलेंसर’ बनाने का काम कर रहा है.

यह दांव भाजपा के क्यों बना मास्टरस्ट्रोक?
भाजपा के लिए यह मास्टरस्ट्रोक क्यों है? पार्टी जानती है कि सिंधिया का ग्वालियर-चंबल में ‘महाराजा’ वाला ब्रांड 2023 विधानसभा चुनाव में कामयाब रहा, लेकिन लंबे समय तक एक व्यक्ति का एकछत्र प्रभाव संगठन में फूट पैदा कर सकता है. पवैया की नियुक्ति पुराने हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं को संदेश देती है कि भाजपा ‘मूल’ नेताओं को भुला नहीं रही. शिवपुरी-गुना जैसे इलाकों में जहां सिंधिया का पारिवारिक प्रभाव गहरा है, पवैया एक वैकल्पिक केंद्र बनेंगे. वित्त आयोग के माध्यम से वे स्थानीय विकास योजनाओं में अपनी छाप छोड़ सकेंगे, जो 2028 के चुनावों के लिए महत्वपूर्ण होगा.

कांग्रेस की स्थिति चिंताजनक
2020 में सिंधिया के जाने के बाद कांग्रेस ग्वालियर-चंबल में बुरी तरह कमजोर हुई. 2023 में भी पार्टी ने मात्र 16 सीटें जीतीं जबकि 2018 में 26 थीं. अब पवैया की एंट्री कांग्रेस के लिए और मुश्किल खड़ी करती है. कांग्रेस सिंधिया-विरोधी वोट को अपने पास खींचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन पवैया जैसे स्थानीय हिंदुत्व चेहरे के सक्रिय होने से वह वोट बैंक भी भाजपा की ओर शिफ्ट हो सकता है. कांग्रेस को अब क्षेत्र में नया नेतृत्व खड़ा करने की जरूरत है, अन्यथा 2028 में ग्वालियर-चंबल उसका ‘काला सूरज’ बना रहेगा.

क्षेत्रीय राजनीति की बात करें तो ग्वालियर-चंबल हमेशा ‘सिंधिया vs बाकी’ का मैदान रहा. तोमर चंबल का मूल भाजपा चेहरा हैं, लेकिन सिंधिया का केंद्रीय मंत्रित्व और संगठनात्मक पहुंच उन्हें आगे ले जाती है. पवैया दोनों के बीच ‘बफर’ बनेंगे. वे विकास निधियों के बंटवारे में क्षेत्रीय संतुलन ला सकते हैं, जिससे छोटे नेताओं और कार्यकर्ताओं को संतोष मिलेगा. यह भाजपा की क्लासिक रणनीति है-फूट को रोकना और एकता को मजबूत करना.

समग्र रूप से यह घटनाक्रम मध्य प्रदेश भाजपा को मजबूत बनाता है. पवैया की सक्रियता से न सिर्फ सिंधिया-तोमर की खींचतान थमेगी, बल्कि कांग्रेस का क्षेत्रीय प्रभाव और कमजोर होगा. 2028 विधानसभा चुनावों से पहले यह ‘पावर बैलेंस’ भाजपा को एकजुट और आक्रामक बनाए रखेगा. राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘सिंधिया को संदेश और पुराने कार्यकर्ताओं को इनाम’ मान रहे हैं. अंततः ग्वालियर-चंबल की राजनीति अब तीन धुरंधरों- सिंधिया, तोमर और पवैया – के त्रिकोण में खेली जाएगी, जो भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा.

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Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें



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