जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) प्रशासन आखिरकार नींद से जाग गया है। दैनिक भास्कर द्वारा शनिवार को लापता कॉलेजों को संबद्धता देने और 10 साल से गायब गोपेश शिक्षा कॉलेज द्वारा 500 छात्रों को बीएड की डिग्री बांटने के सनसनीखेज फर्जीवाड़े को उजागर करने के बाद विवि के अफसर हरकत में आए हैं। जेयू की महाविद्यालय विकास परिषद के निदेशक डॉ. शांतिदेव सिसौदिया ने गोपेश शिक्षा महाविद्यालय सहित 6 बीएड कॉलेजों के प्राचार्यों को नोटिस जारी कर 30 मार्च तक जवाब तलब किया है। हैरानी की बात यह है कि जेयू और एनसीटीई के रिकॉर्ड में जिन पतों पर कॉलेज संचालित होने का दावा किया गया था, वहां असल में निजी घर और अपार्टमेंट बने मिले। स्थानीय निवासियों तक ने कभी इन कॉलेजों के नाम नहीं सुने, जबकि यहां पिछले 20 साल से एडमिशन हो रहे थे। इन डमी कॉलेजों से बिना क्लास जाए हजारों छात्रों ने डिग्रियां हासिल कीं और आज वे सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनकर सेवाएं दे रहे हैं। इस खुलासे ने जेयू की निरीक्षण कमेटियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर वे किन इमारतों का निरीक्षण कर रही थीं, जिन्हें दो दशकों से संबद्धता दी जा रही थी। रजिस्ट्रार डॉ. राजीव मिश्रा के अनुसार, कॉलेजों से भवन अनुमति, संचालन स्वीकृति और पते बदलने संबंधी दस्तावेज मांगे गए हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर सत्र 2026-27 की संबद्धता समाप्त करने की चेतावनी दी गई है। मामले में अब एनसीटीई के उन अफसरों की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जिन्होंने घरों को कॉलेज भवन मानकर मान्यता जारी की और फिर मुड़कर नहीं देखा। इन डमी कॉलेजों को थमाया गया नोटिस दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद जेयू ने जिन 6 कॉलेजों से जवाब-तलब किया है, उनमें पीतांबरा एस्टेट स्थित श्री वैष्णव कॉलेज, गुड़ी गुड़ा का नाका स्थित केएस एजुकेशन, मुरार का गोपेश कॉलेज, सरस्वती नगर स्थित डीवीएस महाविद्यालय, गांधी रोड का आरएससी कॉलेज और विनय नगर का वंदे मातरम् कॉलेज शामिल हैं। ये सभी संस्थान पंजीकृत पते के बजाय अन्य संदिग्ध स्थानों से संचालित पाए गए हैं।
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