इंदौर के लोगों को जल्द ही लवकुश चौराहे के ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलने वाली है। इंदौर विकास प्राधिकरण ने सिक्स लेन लेवल-2 फ्लाईओवर पर 23 मीटर ऊंचाई पर करीब 400 मीट्रिक टन वजनी पहली बो-स्ट्रिंग को लॉन्च कर दिया है। प्राधिकरण का दावा है कि फ्लाईओवर जून तक शुरू हो जाएगा। जिससे इंदौर-उज्जैन रोड पर सफर तेज, सुगम और सिग्नल-फ्री हो जाएगा। यानी रोजाना हजारों वाहन चालकों का समय बचेगा, ईंधन खर्च घटेगा और जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होगी। यह यह फ्लाईओवर मेट्रो लाइन के ऊपर से बन रहा है इस सिक्स लेन-2 फ्लाईओवर का निर्माण 15 जनवरी 2025 को शुरू हुआ था और करीब डेढ़ साल में पूरा हो जाएगा। दरअसल बीते सालों में इंदौर-उज्जैन रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ा है। इसके साथ ही इंदौर को महानगर बनाने की दिशा में यह फ्लाईओवर कनेक्टिविटी आसान करेगा। अभी जिस तरीके से यहां दिन-रात काम चल रहा है, इससे 2028 के सिंहस्थ के पूर्व ही यहां से ट्रैफिक निर्बाध गति से शुरू हो जाएगा। पहले फ्लाईओवर की 5 तस्वीरें देखिए क्या है बो-स्ट्रिंग फ्लाईओवर? बो-स्ट्रिंग डिजाइन में ब्रिज का मुख्य ढांचा धनुष (Bow) के आकार का होता है। यह संरचना भारी भार को संतुलित तरीके से वहन करती है और लंबी दूरी के स्पान को मजबूत सपोर्ट देती है। यही कारण है कि इसे आधुनिक और टिकाऊ ब्रिज डिजाइन माना जाता है। तकनीक और भारी मशीनरी का इस्तेमाल आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े के मुताबिक, लॉन्चिंग के लिए लगभग 800 मीट्रिक टन स्टील स्टेजिंग और गर्डर का उपयोग किया गया। इसके लिए 600 टन और 300 टन क्षमता की क्रेन लगाई गईं। साथ ही 3 विंच मशीनों की मदद से PTFE (पॉलिटेट्राफ्लोरोएथिलीन) पुलिंग तकनीक अपनाई गई। इस अत्याधुनिक तकनीक से बो-स्ट्रिंग को सटीक स्थान पर स्थापित किया गया। 175 करोड़ का प्रोजेक्ट, प्रदेश का पहला बो-स्ट्रिंग पुल करीब 175 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा यह फ्लाईओवर प्रदेश का पहला बो-स्ट्रिंग ब्रिज है। इसके पूरा होने पर उज्जैन रोड की ओर आने-जाने वाला ट्रैफिक सुगम होगा और लवकुश चौराहे पर जाम से राहत मिलेगी।
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