ऐसा मंदिर जहां बकरा खुद होता बेहोश और फिर होता चमत्कार! पढ़ें रीवा के रहस्यमयी काली मंदिर

ऐसा मंदिर जहां बकरा खुद होता बेहोश और फिर होता चमत्कार! पढ़ें रीवा के रहस्यमयी काली मंदिर


Rewa News: मध्यप्रदेश के रीवा शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर बहुरीबांध गांव में एक छोटा सा लेकिन बेहद रहस्यमयी मां काली मंदिर बहुरीबांध स्थित है. बाहर से देखने में ये साधारण सा मंदिर लगता है, लेकिन यहां होने वाली घटनाएं लोगों को हैरान कर देती हैं.

हर नवरात्र में दिखता है “चमत्कार”
चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां जबरदस्त भीड़ उमड़ती है. नौ दिनों तक पूजा, कन्या पूजन और जवारा जैसे कार्यक्रम होते हैं. लोगों का मानना है कि जो भी यहां सच्चे दिल से मन्नत मांगता है, उसकी इच्छा अगली नवरात्र तक जरूर पूरी हो जाती है. यही वजह है कि दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं.

जीभ चढ़ाने की परंपरा
इस मंदिर की सबसे हैरान करने वाली परंपरा है जीभ चढ़ाना.जी हां, कई भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने की आस में यहां अपनी जीभ तक चढ़ा देते हैं. सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए ये आस्था का हिस्सा है. उनका मानना है कि इससे मां काली उनकी हर इच्छा पूरी करती हैं.

बकरे के साथ होने वाला रहस्य
सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की होती है, वो है बकरे की बलि का अनोखा तरीका. जब कोई भक्त जिंदा बकरा चढ़ाता है, तो जैसे ही उसे मां के सामने लाया जाता है वो अचानक बेहोश होकर गिर जाता है. और फिर… जैसे ही उस पर मां के चरणों का जल छिड़का जाता है, वो बकरा उठकर आराम से चलने लगता है! इस घटना को देखने के लिए ही कई लोग खास तौर पर यहां पहुंचते हैं.

हजार साल पुरानी मान्यता
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि ये मंदिर करीब एक हजार साल पुराना है. उनका कहना है कि यह परंपरा उनके दादा-परदादा के समय से चली आ रही है. मां काली को यहां गांव की कुलदेवी माना जाता है और लोगों का विश्वास है कि उनकी कृपा से गांव में कभी चेचक जैसी बीमारी नहीं फैली.

आस्था या अंधविश्वास?
आज के समय में कई लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, लेकिन यहां आने वाले भक्तों के लिए ये सच्चाई है. रीवा ही नहीं, बल्कि प्रयागराज और मिर्जापुर समेत कई जगहों से लोग यहां आते हैं. जो लोग हर जगह से निराश होकर आते हैं, उनका कहना है कि यहां से वे खाली हाथ नहीं लौटते.

आखिर क्या है खास?
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां आस्था इतनी मजबूत है कि लोग कहते हैं कि मां काली के दरबार में तो मौत भी सिर झुका देती है.



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