बच्चों की हिम्मत, जज़्बे और मुस्कान को समर्पित ‘लिटिल चैंपियंस मीट’ का आयोजन केयर सीएचएल हॉस्पिटल, इंदौर द्वारा किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में करीब 20 बच्चों और उनके परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य उन नन्हे योद्धाओं का सम्मान करना था, जिन्होंने कम उम्र में गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करते हुए साहस और दृढ़ता का परिचय दिया। ये सभी बच्चे एनआईसीयू से उपचार के बाद अब स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। कार्यक्रम में बच्चों और उनके परिजनों के साथ भावनात्मक संवाद हुआ। परिवारों ने अपने संघर्ष, उम्मीद और सफलता की कहानियां साझा कीं, जिससे वातावरण प्रेरणादायक बन गया। बच्चों के लिए मनोरंजन, इंटरैक्टिव गतिविधियां और विशेष सरप्राइज भी आयोजित किए गए। मायरा और विराज की प्रेरक कहानी 11 महीने की मायरा के परिजनों ने बताया कि गर्भावस्था के सातवें महीने में मां की तबीयत बिगड़ने के बाद स्थिति गंभीर हो गई थी। सीजेरियन डिलीवरी के बाद बच्ची को एनआईसीयू में विशेष देखभाल दी गई। आज मायरा एक वर्ष की होने जा रही है और पूरी तरह स्वस्थ है। वहीं विराज के अभिभावकों ने साझा किया कि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी और ए-नेगेटिव ब्लड ग्रुप के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। जन्म के बाद बच्चे ने तुरंत रिस्पॉन्स नहीं दिया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे रिवाइव किया और एनआईसीयू में भर्ती कर उपचार किया। पीलिया जैसी समस्या से उबरने के बाद आज विराज 7 वर्ष का स्वस्थ बालक है। हॉस्पिटल के एचसीओओ मनीष गुप्ता ने कहा कि लिटिल चैंपियंस मीट’ बच्चों के साहस को सलाम करने का प्रयास है। सीनियर कंसल्टेंट बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष जैन ने कहा स्वास्थ्य चुनौतियों से उबरने वाले बच्चे वास्तव में प्रेरणा के स्रोत होते हैं। डॉ. सौरभ पिपरसानिया ने मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. पुष्पवर्धन मंडलेचा ने कहा कि कम उम्र में जोड़ रोग जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें और समय पर विशेषज्ञ से सलाह लें। ‘लिटिल चैंपियंस मीट’ न केवल बच्चों के साहस का उत्सव बना, बल्कि समाज में सकारात्मकता, उम्मीद और आत्मविश्वास का संदेश भी दे गया।
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