बाढ़ राहत घोटाले में न्यायिक हिरासत में बंद तत्कालीन तहसीलदार बड़ौदा अमिता सिंह तोमर को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। उनकी ओर से जिला न्यायालय श्योपुर में जमानत अर्जी प्रस्तुत की गई है, जिस पर अब 31 मार्च को सुनवाई प्रस्तावित है। न्यायालय ने सुनवाई से पूर्व केस डायरी तलब की है। खास बात यह है कि पुलिस ने तहसीलदार को केवल सहआरोपी पटवारियों द्वारा कथित तौर पर रकम देने के कथनों के आधार पर ही नहीं, बल्कि राहत राशि वितरण में अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर भी आरोपी बनाया है। पता चला है कि पुलिस को विवेचना में 87 लोगों के 127 खातों में राहत राशि ट्रांसफर किया जाना मिला है। जिनमें से कई खाते पात्र हितग्राहियों की सूची में शामिल नहीं थे। कुछ खाते संबंधित तहसील क्षेत्र से बाहर के भी थे। कुछ मामलों में एक ही खाते में बार-बार राशि डाली गई है। पुलिस ने बताया कि, एक खाते में 22 बार ट्रांजेक्शन दर्ज होना पाया गया है। एक परिवार के चार सदस्यों के खाते में राशि भेजी गई। बता दें कि मामले में तहसीलदार को डीडीओ के रूप में भुगतान की अंतिम स्वीकृति का अधिकार था। 80 लाख नकद लेनदेन की जानकारी वर्ष 2021 की बाढ़ के दौरान राहत वितरण में अनियमितताओं को लेकर करीब 2.57 करोड़ रुपए के गबन के आरोपों की जांच पुलिस कर रही है। प्रकरण में तहसीलदार बड़ौदा अमिता सिंह तोमर के साथ 22 पटवारियों सहित 110 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें चार पटवारी ऐसे थे, जिन्होंने पत्नी, बहू और बच्चों के साथ ही माता-पिता के खातों में रुपए डलवा लिए। तहसीलदार ने कई गैर खातों में रुपए भेजे हैं, इसके बदले कुछ आर्थिक लाभ प्राप्त किया है, जो 80 लाख करीब है, ज्यादा नहीं बता सकते हैं, मामला विवेचना में है।’ – अवनीत शर्मा, एसडीओपी कराहल
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